स्वास्थ्य केंद्र की पानी की टंकी में वो मरकर सड़ते रहे और उसी दूषित पानी की होती रही आपूर्ति
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चिरईगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिरईगांव (पीएचसी) स्थित पानी की टंकी में तीन दिन से बंदर मरे पड़े थे लेकिन इसकी जानकारी किसी को नहीं हो पाई थी। शनिवार को सफाई कर्मचारियों के पहुंचने पर इसकी जानकारी हुई। हालांकि बृहस्पतिवार को ही मरीजों और परिजनों ने पानी में दुर्गंध की शिकायत की थी लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। अब सीएमओ ने मामले की जांच कराने को कहा है।
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग मरीजों की सेहत को लेकर कितना फिक्रमंद हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन दिन तक बंदर टंकी में मरे पड़े रहे और किसी ने उसकी सुध नहीं ली। इसी टंकी से अस्पताल के वार्डों में पेयजल की आपूर्ति होती है। मरीजों-परिजनों ने पानी में दुर्गंध की शिकायत की थी।
सूचना मिलने पर शनिवार को सफाई कर्मी पहुंचे तो टंकी में दो बंदरों के शवों को निकाला। उधर बीडोओ कार्यालय व पीएचसी का हैंडपंप खराब होने के कारण ब्लाक के कर्मचारियों व फरियादियों ने भी इसी टंकी के पानी का सेवन किया।
खुली टंकी से हो रही थी पानी की सप्लाई
स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले अस्पताल में लापरवाही दिखी। यहां खुली टंकी से पानी की सप्लाई की जा रही थी। यही पानी मरीजों के साथ उनके परिजन और स्टाप करता था। कई महीने पहले ही टंकी से ढक्कन हट गया था। इसके बावजूद इसे नहीं ढंका गया। वहीं मरीजों की शिकायत के तीसरे दिन टंकी की सफाई की याद आई। इससे लोग गंभीर बीमारी से ग्रसित हो सकते थे।
पोस्टमार्टम बगैर दफना दिए गए शव
शनिवार को पेयजल टंकी से निकाले गए दोनों शवों को बगैर पोस्टमार्टम कराये जमीन के बंदर दफना दिया गया। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि मृत बंदरों के शव को पोस्टमार्टम के बाद ही दफनाए जाने का प्रावधान है। यदि बगैर पोस्टमार्टम के बंदरों के शवों को दफना दिया वन्य जीव संरक्षण के प्रावधानों के विपरीत है।
डिप्टी सीएमओ करेंगे मामले की जांच : सीएमओ
सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने कहा कि पानी की टंकी में बंदरों के मरे पड़े रहने के मामले की जांच क्षेत्रीय डिप्टी सीएमओ से कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वैसे बंदरों के मरने की जानकारी मिलने के बाद ही पेयजल आपूर्ति को बंद करा दिया गया था। अभी किसी मरीज-परिजन ने पेयजल आपूर्ति से किसी तरह की बीमारी की शिकायत नहीं की है।