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काशी के कण-कण में बसे हैं तुलसी के राम
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वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के भव्य मंदिर का भूमिपूजन करेंगे। भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या है, मगर गोस्वामी तुलसीदास ने काशी के रोम रोम में राम को बसा दिया है। राम चरित मानस की रचना में काशी प्रवास के महत्वपूर्ण प्रमाण मिलते हैं। इसके अलावा राम भक्त हनुमान के विश्व विख़्यात संकट मोचन मंदिर की स्थापना से लेकर उनके भगवान राम पर रचित काव्यों पूर्ण करने में काशी का वर्णन मिलता है। गंगा घाटों से लेकर शहर में संकटमोचन को स्थापित कर शिव की नगरी को राममय बनाया है। कण कण शंकर की नगरी में मानस की रचना के दौरान सनातन समाज को सबल और जागृत बनाने में भी उन्हें प्रभु का यही रूप अधिक याद आया। यही कारण है कि काशी के टोले-मोहल्लों में शौर्य नायक हनुमान के 12 मंदिरों का उन्होंने निर्माण कराया, जिनमें सात को बालरूप हनुमान से ही सजाया। रामभक्त के जरिए उन्होंने काशी को ही राममय कर दिया है।
मन मंदिर में भगवान श्रीराम को बसाए गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान के जरिए भगवान राम के चरित और जीवन का बखान किया है। कागजी प्रमाणों का अभाव है, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित मंदिरों के प्रति लोगों में अपार श्रद्धा का भाव है। काशी की मान्यताओं के अनुसार गंगा तट पर तुलसीदास को स्थायी ठौर मिला, वहां उन्होंने दक्षिणमुखी हनुमत प्रतिमा स्थापित की। कर्णघंटा, बूंदी राजघराने के परकोटा भवन, दारानगर क्षेत्र में हनुमान मंदिर की स्थापना की। प्रह्लादघाट में दक्षिणमुखी हनुमान की स्थापना की।
रामचरित मानस को मिला विश्वनाथ का समर्थन
जनश्रुतियों और ग्रंथों में तुलसीदास के काशी प्रवास से लेकर रामचरित मानस तक का जिक्र मिलता है। ग्रंथों के अनुसार भगवान राम के सबसे बडे़ ग्रंथ रामचरित मानस की रचना के दौरान काशी के कुछ अनुदार पंडितों के विरोध का भी सामना करना पड़ा था। रामचरितमानस की पाडुलिपि को नष्ट करने के भी प्रयास हुए। भगवान विश्वनाथ के मंदिर में पाडुलिपि रखी गई और मानस को विश्वनाथजी का समर्थन मिला। तब, विरोधी तुलसी के सामने नतमस्तक हुए।
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तुलसी के हाथों हुई थी संकटमोचन मंदिर की स्थापना
संकट मोचन मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसकी स्थापना गोस्वामी तुलसीदास ने किया। गोस्वामी तुलसीदास ने स्वरचित हनुमानाष्टक में संकटमोचन का उल्लेख किया है। मंदिर के वसीयतनामे में उल्लेख मिलता है कि अति प्राचीन तालाब का जीर्णोद्धार 1904 में कराया गया था। भू-अभिलेखों के मुताबिक मंदिर परिसर में जंगल के बीच स्थित इस तालाब में गंगा और असि नदी के बाढ़ का पानी पहुंचता था।
रामचरित मानस के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन चरित को हर भक्त आसानी से समझ सकते हैं। इस महाकाव्य की रचना गोस्वामी तुसलीदास ने काशी में की थी और उन्होंने भगवान राम के अनन्य भक्त की उपासना कर काशी के कण कण में राम को बसा दिया है। भगवान राम के भक्त हनुमान की आराधना कर काशी के लोग भी प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन रहते हैं।
विश्वंभर नाथ मिश्र, महंत संकट मोचन मंदिर
भगवान राम के जीवन चरित को जन जन तक पहुुंचाने का श्रेय गोस्वामी तुलसीदास को जाता है। रामचरित मानस की चौपाई, दोहा और छंद काशी की हर जुबान पर है। यहां तुलसी के राम हर व्यक्ति के ह़दय में हैं। कई ग्रंथों में तुलसीदास के द्वारा रामभक्त हनुमान के मंदिरों की स्थापना के प्रमाण हैं।
बालक दास, महंत, पातालपुरी
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मन मंदिर में भगवान श्रीराम को बसाए गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान के जरिए भगवान राम के चरित और जीवन का बखान किया है। कागजी प्रमाणों का अभाव है, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित मंदिरों के प्रति लोगों में अपार श्रद्धा का भाव है। काशी की मान्यताओं के अनुसार गंगा तट पर तुलसीदास को स्थायी ठौर मिला, वहां उन्होंने दक्षिणमुखी हनुमत प्रतिमा स्थापित की। कर्णघंटा, बूंदी राजघराने के परकोटा भवन, दारानगर क्षेत्र में हनुमान मंदिर की स्थापना की। प्रह्लादघाट में दक्षिणमुखी हनुमान की स्थापना की।
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रामचरित मानस को मिला विश्वनाथ का समर्थन
जनश्रुतियों और ग्रंथों में तुलसीदास के काशी प्रवास से लेकर रामचरित मानस तक का जिक्र मिलता है। ग्रंथों के अनुसार भगवान राम के सबसे बडे़ ग्रंथ रामचरित मानस की रचना के दौरान काशी के कुछ अनुदार पंडितों के विरोध का भी सामना करना पड़ा था। रामचरितमानस की पाडुलिपि को नष्ट करने के भी प्रयास हुए। भगवान विश्वनाथ के मंदिर में पाडुलिपि रखी गई और मानस को विश्वनाथजी का समर्थन मिला। तब, विरोधी तुलसी के सामने नतमस्तक हुए।
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तुलसी के हाथों हुई थी संकटमोचन मंदिर की स्थापना
संकट मोचन मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसकी स्थापना गोस्वामी तुलसीदास ने किया। गोस्वामी तुलसीदास ने स्वरचित हनुमानाष्टक में संकटमोचन का उल्लेख किया है। मंदिर के वसीयतनामे में उल्लेख मिलता है कि अति प्राचीन तालाब का जीर्णोद्धार 1904 में कराया गया था। भू-अभिलेखों के मुताबिक मंदिर परिसर में जंगल के बीच स्थित इस तालाब में गंगा और असि नदी के बाढ़ का पानी पहुंचता था।
रामचरित मानस के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन चरित को हर भक्त आसानी से समझ सकते हैं। इस महाकाव्य की रचना गोस्वामी तुसलीदास ने काशी में की थी और उन्होंने भगवान राम के अनन्य भक्त की उपासना कर काशी के कण कण में राम को बसा दिया है। भगवान राम के भक्त हनुमान की आराधना कर काशी के लोग भी प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन रहते हैं।
विश्वंभर नाथ मिश्र, महंत संकट मोचन मंदिर
भगवान राम के जीवन चरित को जन जन तक पहुुंचाने का श्रेय गोस्वामी तुलसीदास को जाता है। रामचरित मानस की चौपाई, दोहा और छंद काशी की हर जुबान पर है। यहां तुलसी के राम हर व्यक्ति के ह़दय में हैं। कई ग्रंथों में तुलसीदास के द्वारा रामभक्त हनुमान के मंदिरों की स्थापना के प्रमाण हैं।
बालक दास, महंत, पातालपुरी