{"_id":"570819d44f1c1bd772c812bf","slug":"tue-mother-wished-to-establish-world-urn","type":"story","status":"publish","title_hn":"कलश स्थापन कर जगत जननी से मंगल कामना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कलश स्थापन कर जगत जननी से मंगल कामना
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 09 Apr 2016 02:21 AM IST
विज्ञापन
दर्शन्ा-पूजन करतीं महिलाएं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कलश स्थापना की साथ ही शुक्रवार को वासंतिक नवरात्र की नौ दिवसीय देवी आराधना आरंभ हो गई। मंदिरों में तो भव्य झांकियां सजाई ही गईं। घर-घर में कलश स्थापना कर दुर्गा स्तोत्र के पाठ और अन्य अनुष्ठान शुरू कर दिए गए। अखंड दीप जलाकर कामनाओं की पूर्ति के लिए देवी की उपासना की जा रही है। मां की आराधना से वातावरण देवीमय हो गया है।
नमस्ते रुद्ररूपिण्ये नमस्ते मधु मर्दिनी नम: कैटभ हारिण्ये नमस्ते महिषार्दिनी...। इन्हीं मंत्रों के साथ नव संवत्सर की प्रतिपदा लगते ही वासंतिक नवरात्र की आराधना शुरू हुई। सुबह से ही पुरोहितों ने कलश स्थापन कराना शुरू किया। देवी के आवाहन के साथ ही वेदियों पर कलश स्थापन कर मां की स्तुति आरंभ की गई।
वांसतिक नवरात्र में अखंड दीप जलाकर मां को प्रसन्न करने में भक्त जुट गए। मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त यथाशक्ति उपायों में जुटे हुए हैं। देवी को प्रसन्न करने के लिए मंदिरों में कहीं अनुष्ठान तो कहीं पाठ होने लगे। तमाम भक्त जप और ध्यान के जरिए मां को प्रसन्न करने के लिए लगे हुए हैं। शीतला मंदिर के प्रधान पुजारी पं. शिव प्रसाद पांडेय कहते हैं कि मां अपने भक्तों पर थोड़े से उपायों से भी प्रसन्न हो जाती हैं। इसलिए नवरात्र में मां का ध्यान कर आंतरिक ऊर्जा को प्राप्त करना चाहिए।
विज्ञापन
वासंतिक नवरात्र के पहले दिन काशी में मां शैलपुत्री के दरबार में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। फूलों, हरी पत्तियों से सजे मां के दरबार में महिलाओं, पुरुषों और युवाओं लंबी कतार लगी। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सविधि मंत्रोच्चार के बाद गुरुवार की रात 12 बजे ही फूलों, हरी पत्तियों से सजे मां शैलपुत्री के दरबार को आम भक्तों के लिए खोल दिया गया। इसी के साथ लंबी कतार में लगे भक्त मां के चरणों में हाजिरी लगाने लगे। सुबह सात बजे तक कज्जाकपुरा से अलईपुर तक लाइन लग गई थी। पुजारी बच्चे लाल गोस्वामी ने बताया कि 30 से अधिक पुजारियों, सेवादारों की टीम लगाई गई है। इसके बावजूद इंतजाम नहीं संभल पा रहे हैं। महिलाओं, पुरुषों के लिए अलग-अलग रास्ते मंदिर में प्रवेश करने के लिए बनाए गए हैं। देर रात तक भक्तों की कतार मां के दरबार में लगी रही। उधर, गौरी के नौ स्वरूपों में प्रथम स्वरूप मुखनिर्मालिका के दर्शन के लिए गायघाट स्थित मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही। षोडशोपचार विधि से पूजन के बाद भोर में मां के कपाट खुले और दर्शन शुरू हो गया। इनके अलावा दुर्गाकुंड में दुर्गा माता, शीतला घाट पर शीतला और नवापुरा में नव दुर्गा मंदिर के अलावा देवनाथपुरा में शव शिवाकाली के मंदिरों में नवरात्र के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ रही।
विज्ञापन
नमस्ते रुद्ररूपिण्ये नमस्ते मधु मर्दिनी नम: कैटभ हारिण्ये नमस्ते महिषार्दिनी...। इन्हीं मंत्रों के साथ नव संवत्सर की प्रतिपदा लगते ही वासंतिक नवरात्र की आराधना शुरू हुई। सुबह से ही पुरोहितों ने कलश स्थापन कराना शुरू किया। देवी के आवाहन के साथ ही वेदियों पर कलश स्थापन कर मां की स्तुति आरंभ की गई।
विज्ञापन
वांसतिक नवरात्र में अखंड दीप जलाकर मां को प्रसन्न करने में भक्त जुट गए। मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त यथाशक्ति उपायों में जुटे हुए हैं। देवी को प्रसन्न करने के लिए मंदिरों में कहीं अनुष्ठान तो कहीं पाठ होने लगे। तमाम भक्त जप और ध्यान के जरिए मां को प्रसन्न करने के लिए लगे हुए हैं। शीतला मंदिर के प्रधान पुजारी पं. शिव प्रसाद पांडेय कहते हैं कि मां अपने भक्तों पर थोड़े से उपायों से भी प्रसन्न हो जाती हैं। इसलिए नवरात्र में मां का ध्यान कर आंतरिक ऊर्जा को प्राप्त करना चाहिए।
विज्ञापन
वासंतिक नवरात्र के पहले दिन काशी में मां शैलपुत्री के दरबार में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। फूलों, हरी पत्तियों से सजे मां के दरबार में महिलाओं, पुरुषों और युवाओं लंबी कतार लगी। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सविधि मंत्रोच्चार के बाद गुरुवार की रात 12 बजे ही फूलों, हरी पत्तियों से सजे मां शैलपुत्री के दरबार को आम भक्तों के लिए खोल दिया गया। इसी के साथ लंबी कतार में लगे भक्त मां के चरणों में हाजिरी लगाने लगे। सुबह सात बजे तक कज्जाकपुरा से अलईपुर तक लाइन लग गई थी। पुजारी बच्चे लाल गोस्वामी ने बताया कि 30 से अधिक पुजारियों, सेवादारों की टीम लगाई गई है। इसके बावजूद इंतजाम नहीं संभल पा रहे हैं। महिलाओं, पुरुषों के लिए अलग-अलग रास्ते मंदिर में प्रवेश करने के लिए बनाए गए हैं। देर रात तक भक्तों की कतार मां के दरबार में लगी रही। उधर, गौरी के नौ स्वरूपों में प्रथम स्वरूप मुखनिर्मालिका के दर्शन के लिए गायघाट स्थित मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही। षोडशोपचार विधि से पूजन के बाद भोर में मां के कपाट खुले और दर्शन शुरू हो गया। इनके अलावा दुर्गाकुंड में दुर्गा माता, शीतला घाट पर शीतला और नवापुरा में नव दुर्गा मंदिर के अलावा देवनाथपुरा में शव शिवाकाली के मंदिरों में नवरात्र के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ रही।