Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Training on better utilization of crop residues provided at International Rice Research Institute Varanasi

इरी: पराली से बनेगी खाद, पशु चारा और ऊर्जा; फसल अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल का दिया जा रहा प्रशिक्षण

Thu, 05 Nov 2026 12:47 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 05 Nov 2026 12:47 PM IST
सार

इरी के आइसार्क में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। तीन से पांच नवंबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में फसल अवशेषों से खाद, पशु चारा, बायोचार और ऊर्जा तैयार करने की तकनीक बताई जा रही है। 

विज्ञापन
Training on better utilization of crop residues provided at International Rice Research Institute Varanasi
फसल अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल का दिया जा रहा प्रशिक्षण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन और उनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (इरी) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। तीन से पांच नवंबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में फसल अवशेषों से खाद, पशु चारा, बायोचार और ऊर्जा तैयार करने की तकनीक बताई जा रही है। साथ ही इनके प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाली कृषि मशीनों के संचालन और रखरखाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। तीन नवंबर को कार्यक्रम का उद्घाटन वाराणसी के उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने किया। 

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि सरकार फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ी मशीनों पर सब्सिडी दे रही है। ऐसे प्रशिक्षण किसानों को मशीनों के सही संचालन, मरम्मत और रखरखाव की जानकारी देने में मददगार हैं। आइसार्क के अंतरिम निदेशक डॉ. विकास कुमार सिंह ने कहा कि फसल अवशेषों को बेकार समझने के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में देखना चाहिए। तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाना और उनके लिए आर्थिक रूप से लाभकारी समाधान तैयार करना जरूरी है।
विज्ञापन




प्रशिक्षण में इरी, अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र (सिमीट) और आईसीएआर-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के विशेषज्ञ जानकारी दे रहे हैं। इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के कृषि विज्ञान केंद्रों सहित विभिन्न कृषि संस्थानों, विश्वविद्यालयों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। बांग्लादेश के कृषि विस्तार विभाग के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रशिक्षण के दौरान खेत में ही फसल अवशेषों के प्रबंधन और खेत से बाहर उनके उपयोग के तरीके बताए जा रहे हैं। इस मौके पर स्मार्ट सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज मशीन और बेलर का प्रदर्शन हुआ। प्रतिभागियों को इनके संचालन की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा फसल अवशेषों से मशरूम उत्पादन, पशु चारा, कम्पोस्ट, बायोचार और बायोमास ऊर्जा तैयार करने के तरीके बताए जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed