{"_id":"5aaa49264f1c1bc3758b586b","slug":"traditional-games-tournament-will-be-organised-in-kashi-ganga","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":" काशी में गंगा की रेती पर होगा एशिया के पारंपरिक खेलों का महाकुंभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी में गंगा की रेती पर होगा एशिया के पारंपरिक खेलों का महाकुंभ
आलोक कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 16 Mar 2018 10:27 AM IST
विज्ञापन
एथनिक स्पोर्ट्स कल्चरल फेस्टिवल को नवंबर में कराने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी अब एशिया के पारंपरिक खेलों की गवाह बनने जा रही है। गंगा की रेती पर पारंपरिक खेलों के महाकुंभ की तैयारी की जा रही है। इसके तहत एशिया के 14 से अधिक देशों के एथनिक स्पोर्ट्स कल्चरल फेस्टिवल को काशी में गंगा की रेती पर नवंबर में कराने की योजना है।
वर्ल्ड एथनोस्पोर्ट्स और यूनेस्को के साथ मिलकर यह तैयारी की जा रही है। काशी में अगले माह होने वाली पारंपरिक खेलों की कांफ्रेंस में इसका पूरा मसौदा तैयार किया जाएगा। एशिया के पारंपरिक खेलों को संजीवनी देने और उन्हें जीवंत करने के लिए यूनेस्को और वर्ल्ड एथनोस्पोर्ट्स आगे आया है।
पढ़ेंः भारत के पारंपरिक खेलों को सहेजेगा यूनेस्को, UP के इस शहर से होगी शुरुआत
विज्ञापन
पारंपरिक खेलों के महाकुंभ की शुरूआत काशी से करने की तैयारी की जा रही है। इसमें सेंट्रल एशिया, साउथ ईस्ट और साउथ एशिया के लगभग 14 से अधिक देशों को एक साथ लाने की तैयारी है।
इसमें जहां भारत के जोड़ी गदा, मलखंभ, गुल्ली डंडा, मुठ्ठी फाइटिंग, तुर्की की कुश्ती, सिंगापुर का मैनकाला, फिलीपींस का सुंगका, थाईलैंड का पोल क्लाइंबिंग, लुक हिन, इंडोनेशिया का गरुण और सेंट्रल एशिया का पारंपरिक खेल भी देखने को मिलेगा।
यूनेस्को वर्तमान में विश्व के पारंपरिक खेलों को सहेजने की पहल कर रहा है। इसके तहत एथनिक स्पोर्ट्स कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन एक बड़ा कदम है।
विज्ञापन
वर्ल्ड एथनोस्पोर्ट्स और यूनेस्को के साथ मिलकर यह तैयारी की जा रही है। काशी में अगले माह होने वाली पारंपरिक खेलों की कांफ्रेंस में इसका पूरा मसौदा तैयार किया जाएगा। एशिया के पारंपरिक खेलों को संजीवनी देने और उन्हें जीवंत करने के लिए यूनेस्को और वर्ल्ड एथनोस्पोर्ट्स आगे आया है।
विज्ञापन
पढ़ेंः भारत के पारंपरिक खेलों को सहेजेगा यूनेस्को, UP के इस शहर से होगी शुरुआत
विज्ञापन
पारंपरिक खेलों के महाकुंभ की शुरूआत काशी से करने की तैयारी की जा रही है। इसमें सेंट्रल एशिया, साउथ ईस्ट और साउथ एशिया के लगभग 14 से अधिक देशों को एक साथ लाने की तैयारी है।
इसमें जहां भारत के जोड़ी गदा, मलखंभ, गुल्ली डंडा, मुठ्ठी फाइटिंग, तुर्की की कुश्ती, सिंगापुर का मैनकाला, फिलीपींस का सुंगका, थाईलैंड का पोल क्लाइंबिंग, लुक हिन, इंडोनेशिया का गरुण और सेंट्रल एशिया का पारंपरिक खेल भी देखने को मिलेगा।
यूनेस्को वर्तमान में विश्व के पारंपरिक खेलों को सहेजने की पहल कर रहा है। इसके तहत एथनिक स्पोर्ट्स कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन एक बड़ा कदम है।
पारंपरिक खेलों के महाकुंभ में ये देश होंगे शामिल
unesco
यूनेस्को में पारंपरिक खेलों के सलाहकार अलेक्सी किलासोव ने बताया कि स्ट्रांगमैन स्पोर्ट्स और एथनोस्पोर्ट्स के साथ मिलकर पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत वाराणसी में एथनिक स्पोर्ट्स कल्चरल फेस्टिवल की तैयारी की जा रही है।
वर्ल्ड एथनोस्पोर्ट्स गेम्स के सदस्य प्रदीप बाबा मधोक ने बताया कि अप्रैल में सेंट्रल, साउथ ईस्ट और साउथ एशिया के 14 देशों के अधिकारियों की बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक में गंगा की रेती पर एशिया के लगभग सभी ट्रैडिशनल गेम्स कराने का खाका तैयार किया जाएगा।
शामिल होने वाले देश
-भारत
-सिंगापुर
-सऊदी अरब
-श्रीलंका
-संयुक्त अरब अमीरात
-वियतनाम
-मॉरीशस
-मालदीव
-भूटान
-नेपाल
-थाईलैंड
-चीन
-इंडोनेशिया
-फिलीपींस