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युवाओं को हथकरघा से जोड़कर बचाई जा सकती है परंपरा : डॉ. रजनीकांत

Sun, 08 Aug 2021 02:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 02:06 AM IST
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Tradition can be saved by connecting youth with handloom: Dr. Rajinikanth
पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने में हथकरघा बुनकर अपनी भूमिका निभा सकते हैं। युवाआें को हथकरघा से जोड़कर प्राचीन परंपरा को बचाया जा सकता है। वह शनिवार को चौकाघाट स्थित भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रेक्षागृह में सातवें हथकरघा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
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मुख्य अतिथि विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने बुनकरों से हथकरघा की परंपरा को सुरक्षित और संवर्धित रखने के लिए आग्रह किया। कहा कि हथकरघा उत्पादों की बाजार में असीम संभावनाएं हैं। नए डिजाइन और इको-फ्रेंडली रंग युक्त उत्पादों की बाजार में जबरदस्त मांग है। नवीन कपूर ने कहा कि इन वस्तुओं की विदेशों में बहुत मांग है। हथकरघा उपनिदेशक एसपी ठुबरिकर ने बुनकरों से आग्रह किया कि भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान ने इस वर्ष हथकरघा के नए डिग्री कोर्स शुरू किए हैं। इसमें अपने बच्चों को प्रवेश दिलाएं। इस दौरान बुनकरों को सम्मानित किया गया। मौके पर सहायक आयुक्त हथकरघा, राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम, निट्रा पावरलूम सर्विस सेंटर, वस्त्र समिति, वस्त्र परीक्षण प्रयोगशाला, भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधि थे। बुनकरों में हाजी रईस अहमद, कमालुद्दीन अंसारी, पीर मोहम्मद, रामलाल मौर्या, मोहम्मद असलम, नसीम अहमद, ऐनुल हक, मोइनुद्दीन थे। संचालन और धन्यवाद मोहम्मद यासीन ने किया।
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