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Varanasi News: तीन पीढि़यों ने एक साथ सितार पर छेड़ी तान, संगीत के पुरोधाओं की बंदगी

Sun, 15 Mar 2026 01:38 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2026 01:38 AM IST
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Three generations played the sitar together, worshiping the pioneers of music.
नागरीय नाट्य मंडली में हुए नमन संगीत समारोह में नृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार., अमर उजाला - फोटो : samvad
वाराणसी। नागरी नाटक मंडली के मंच पर बनारस घराने के पुरोधाओं को नमन करने सधे साधकों के साथ नवांकुर भी उतरे। तब सभी चकित हो उठे, जब मंच पर एक साथ तीन पीढ़ियां सितार वादन के लिए उतरीं। पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र, बेटे पं. देवब्रत मिश्र और पौत्र कृष्ण मिश्र ने संगीत की उपासना करते हुए परंपरा को विस्तार दिया। गुरु-शिष्य परंपरा के अद्भुत संयोग भी दिखा। मौका था शनिवार को गुरुजनों एवं महान कलाकारों को समर्पित सांगीतिक अनुष्ठान, नमन की दूसरी निशा का।
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संगीत परिषद की ओर से आयोजित संगीत संध्या में पं. शिवनाथ मिश्र ने बेटे, पौत्र और शिष्य वत्स अग्निहोत्री के साथ मंच संभाला। सभी ने उनका हर हर महादेव के जयघोष और तालियों के साथ अभिवादन किया। उन्होंने सितार पर तान छेड़ी तो हर कोई उनका मुरीद हो गया। राग गोरख कल्याण में रूपक ताल में बंदिश को सितार पर विस्तार देकर सभी के दिलों के तार जोड़ दिए। तीन ताल के बाद बनारसी दादरा डगर बीच कैसे चलूं... की धुन बजाई तो श्रोता भी तालियों से ताल मिलाने लगे।
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तबले पर दौहित्र प्रशांत मिश्र और तानपुरे पर बेल्जियम के सेप्पे ने संगत की। इसके पहले डॉ. रेवती साकलकर ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। उन्होंने बनारस घराने की प्रसिद्ध बंदिशें सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। राग पहाड़ी में ठुमरी रंग सारी गुलाबी चुनरिया... सुनाई। इसके बाद राग कौशिक ध्वनि में दादरा श्याम तोहे नजरिया लग जाएगी..., होरी रंग डारूंगी नंद के लालन पर... सुनाकर सभी को मदमस्त कर दिया। अंत में चैती बैरन रे कोयलिया तोरी बोली ना सोहाये... प्रस्तुत की। सितार पर आनंद मिश्र, तबले पर प्रीतम मिश्र, हारमोनियम पर पंकज मिश्र और मार्कस पर प्रांजलि ने संगत दी। अंतिम प्रस्तुति बनारस घराने के युवा कथक नर्तक सौरव-गौरव मिश्र बंधुओं की रही। उन्होंने शिव स्तुति से शुरुआत की। बनारस की पारंपरिक तिहाइयां, टुकड़े, आमद और चक्करदार बंदिश पर कथक प्रस्तुत कर सबको मुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध बंदिश काशी के खेवइया, भंग के छन्नैया, तुम हो भोलेनाथ... पर भावनृत्य से गुरुजनों को नमन किया।
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नृत्य निर्देशक पं. रविशंकर, तबले पर रामकुमार मिश्र, पखावज पर सिद्धार्थ चक्रवर्ती, गायन पर मोहित साहनी, सितार पर मितेश मिश्र, कैजान पर विशाल ने संगत दी। अंत में कलाकारों के लिए साज बनाने वाले कारीगरों का सम्मान हुआ, जिसमें हारमोनियम के लक्ष्मीनारायण, तबला के जगन्नाथ प्रसाद आदि कारीगर शामिल रहे। स्वागत संगीत परिषद के अध्यक्ष विनय जैन तथा धन्यवाद ज्ञापन महासचिव विनोद अग्निहोत्री ने किया। इस मौके पर उपशास्त्री गायिका सुचरिता गुप्ता, संजय मेहता, सुरेंद्र मिश्रा शीलू, दिव्यांश आदि उपस्थित रहे।
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