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कुएं में कूदे दादा को बचाने में बेटे-पोते की भी मौत, एनडीआरएफ के जनरेटर में लगी आग
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 10 Oct 2018 10:28 AM IST
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बचाव कार्य जारी
- फोटो : amar ujala
बनारस के जैतपुरा थाना अंतर्गत बघवानाला क्षेत्र में चौरा माता मंदिर के समीप स्थित सौ फीट से ज्यादा गहरे कुएं में मंगलवार की रात काशी राजभर (75) ने छलांग लगा कर जान दे दी। काशी को छलांग लगाते देख उन्हें बचाने के लिए उनका बड़ा बेटा अनिल (28) भी कुएं में कूद गया। पिता-पुत्र को बचाने के लिए अनिल की पट्टीदारी के भतीजे गोविंद (18) ने भी छलांग लगा दी।
सौ नंबर पर आई सूचना के आधार पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे और तीनों के शव को बाहर निकालने का प्रयास शुरू हुआ। काशी के कुएं में कूदने की वजह उनकी बीमारी और पारिवारिक कलह बताई गई है। वहीं राहत और बचाव कार्य करने पहुंची एनडीआरएफ की टीम के जनरेटर में देर रात आग लगने से हडकंप भी मच गया।
बघवानाला निवासी काशी राजभर बुढ़ापा और सांस संबंधी बीमारी से परेशान रहते थे। इसके साथ ही परिवार में आए दिन किचकिच से भी वो आजिज आ गए थे। बताया जाता है कि रात साढ़े आठ बजे के लगभग परिवार में किसी बात को लेकर कहासुनी हुई।
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इस पर काशी घर से चंद कदम की दूर स्थित कुएं में कूद कर जान देने की बात कहते हुए घर से निकले। पीछे-पीछे बेटा अनिल भी दौड़ा लेकिन तब तक काशी कुएं में छलांग लगा चुके थे।
इसके बाद अनिल और फिर उसके चचेरे भाई राधेश्याम के तीन बेटों में से दूसरे नंबर का गोविंद छलांग लगा दिया। एनडीआरएफ के जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद रात 10:45 बजे के लगभग काशी का शव बाहर निकाला जबकि अन्य दोनों का शव बाहर निकालने का प्रयास जारी था।
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सौ नंबर पर आई सूचना के आधार पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे और तीनों के शव को बाहर निकालने का प्रयास शुरू हुआ। काशी के कुएं में कूदने की वजह उनकी बीमारी और पारिवारिक कलह बताई गई है। वहीं राहत और बचाव कार्य करने पहुंची एनडीआरएफ की टीम के जनरेटर में देर रात आग लगने से हडकंप भी मच गया।
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बघवानाला निवासी काशी राजभर बुढ़ापा और सांस संबंधी बीमारी से परेशान रहते थे। इसके साथ ही परिवार में आए दिन किचकिच से भी वो आजिज आ गए थे। बताया जाता है कि रात साढ़े आठ बजे के लगभग परिवार में किसी बात को लेकर कहासुनी हुई।
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इस पर काशी घर से चंद कदम की दूर स्थित कुएं में कूद कर जान देने की बात कहते हुए घर से निकले। पीछे-पीछे बेटा अनिल भी दौड़ा लेकिन तब तक काशी कुएं में छलांग लगा चुके थे।
इसके बाद अनिल और फिर उसके चचेरे भाई राधेश्याम के तीन बेटों में से दूसरे नंबर का गोविंद छलांग लगा दिया। एनडीआरएफ के जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद रात 10:45 बजे के लगभग काशी का शव बाहर निकाला जबकि अन्य दोनों का शव बाहर निकालने का प्रयास जारी था।
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पांच साल से नहीं उपयोग किया जा रहा था कुएं का पानी
घटनास्थल पर एनडीआरएफ की टीम
- फोटो : amar ujala
जिस कुएं में बुजुर्ग काशी राजभर, उनके बेटे अनिल और पोते गोविंद की मौत हुई, उसके पानी का पिछले पांच साल से उपयोग नहीं किया जा रहा था। वर्षों पुराने कुआं अत्यधिक गहरा होने के कारण उसकी सफाई भी नहीं हो पा रही थी। हालांकि कुएं का उपयोग न होने के बावजूद उसे ढंका नहीं गया था।
इस बीच काशी के परिजन और मुहल्ले के लोग रात भर कुएं के इर्दगिर्द ही मौजूद रहे। बघवानाला में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद उनके परिजनों के साथ ही मुहल्ले के लोग भी गमगीन दिखे। काशी के दो बेटे सियालाल और अनिल था। सियालाल मुंबई में बहन के पास रहता है।
मजदूरी करने वाले अनिल की पत्नी प्रियंका का रो-रोकर बुरा हाल था। प्रियंका का कहना था कि उसके दोनों बच्चों और उसकी जिंदगी अब किसके सहारे कटेगी। अनिल तैरना नहीं जानते थे फिर भी न कुएं में क्यों कूद गए।
प्रियंका का रोना देख उसे ढांढस बंधाने आई मुहल्ले की महिलाओं की हिम्मत भी जवाब दे जा रही थी। उधर, गोविंद के पिता राधेश्याम, उसकी मां बिटुना, दोनोें भाईयों और एक बहन की हालत भी बेसुधों जैसी थी। पूरा मुहल्ला सभी को ढांढस बंधाने में जुटा हुआ था।
इस बीच काशी के परिजन और मुहल्ले के लोग रात भर कुएं के इर्दगिर्द ही मौजूद रहे। बघवानाला में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद उनके परिजनों के साथ ही मुहल्ले के लोग भी गमगीन दिखे। काशी के दो बेटे सियालाल और अनिल था। सियालाल मुंबई में बहन के पास रहता है।
मजदूरी करने वाले अनिल की पत्नी प्रियंका का रो-रोकर बुरा हाल था। प्रियंका का कहना था कि उसके दोनों बच्चों और उसकी जिंदगी अब किसके सहारे कटेगी। अनिल तैरना नहीं जानते थे फिर भी न कुएं में क्यों कूद गए।
प्रियंका का रोना देख उसे ढांढस बंधाने आई मुहल्ले की महिलाओं की हिम्मत भी जवाब दे जा रही थी। उधर, गोविंद के पिता राधेश्याम, उसकी मां बिटुना, दोनोें भाईयों और एक बहन की हालत भी बेसुधों जैसी थी। पूरा मुहल्ला सभी को ढांढस बंधाने में जुटा हुआ था।
तेज धमाके के साथ लगी आग
जनरेटर लगी आग
- फोटो : amar ujala
पुलिस की सूचना पर 11 एनडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे तो लाइट बैलून में गैस भरने की मशीन थोड़ी देर तक स्टार्ट ही नहीं हुई। मशीन स्टार्ट हुई थी कि अचानक तेज धमाके के साथ बैलून फट गया और जनरेटर में आग लग गई। आग लगने के कारण मौके पर भगदड़ मच गई और इस दौरान दो महिलाओं सहित पांच लोगों को चोट भी आई।
लगभग दस मिनट बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया तो एनडीआरएफ के जवान ऑक्सीजन सिलेंडर से लैस होकर रस्सी के सहारे कुएं में उतरे। इससे पहले कुएं में लालटेन डाली गई तो 40 फीट की गहराई पर जाकर बुझ गई। इससे कुएं में जहरीली गैस होने की आशंका जताई गई।
वहीं मामले में इंस्पेक्टर जैतपुरा ने बताया कि बुजुर्ग बीमारी और पारिवारिक कलह से आजिज आकर कुएं में कूदे थे। उन्हें बचाने के चक्कर में उनका बेटा अनिल और पट्टीदारी का लड़का गोविंद भी छलांग लगा दिए।
लगभग दस मिनट बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया तो एनडीआरएफ के जवान ऑक्सीजन सिलेंडर से लैस होकर रस्सी के सहारे कुएं में उतरे। इससे पहले कुएं में लालटेन डाली गई तो 40 फीट की गहराई पर जाकर बुझ गई। इससे कुएं में जहरीली गैस होने की आशंका जताई गई।
वहीं मामले में इंस्पेक्टर जैतपुरा ने बताया कि बुजुर्ग बीमारी और पारिवारिक कलह से आजिज आकर कुएं में कूदे थे। उन्हें बचाने के चक्कर में उनका बेटा अनिल और पट्टीदारी का लड़का गोविंद भी छलांग लगा दिए।