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काशी में जुटेंगी देश भर की महिला इतिहासकार
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 25 Jan 2016 01:46 AM IST
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भारतीय इतिहास संकलन समिति के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत है। आज जो इतिहास पढ़ाया जा रहा है वह सिक्के का एक पहलू है, यानी अधूरा है। जल्द ही पाठ्यक्रम में नए अध्याय जोड़े जाएंगे।
यह बदलाव जल्द दिखने लगेगा। कहा कि इतिहास पुनर्लेखन पर चर्चा के लिए अगस्त महीने में काशी में ‘इतिहास लेखन के महिला स्रोत’ विषय पर वृहद परिचर्चा का आयोजन किया गया है। इस परिचर्चा में देश भर की 500 महिला इतिहासकार शामिल होंगी।
रविवार की दोपहर भेलूपुर स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. बालमुकुंद ने कहा कि इतिहास का पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा अब तक जिनके पास रहा वे वामपंथी मानसिकता के लोग रहे हैं। यही वजह है कि आज इतिहास के नाम पर जो पढ़ाया जा रहा है वह पूरा सच नहीं है।
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अधूरा ज्ञान सबसे खतरनाक होता है। गुलामी का इतिहास नहीं अब युवा पीढ़ी क्रांतिकारियों की गौरव गाथा यानी वास्तविक इतिहास पढ़ेगी। कहा कि 22 और 23 अक्तूबर को कुशीनगर में इतिहास पुनर्लेखन पर परिचर्चा होगी। इसमें 500 से अधिक पुरुष इतिहासकार शामिल होंगे। इसी प्रकार 19-20 मार्च को युवा इतिहासकारों का सम्मेलन प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास संकलन समिति का मानना है कि उपनिवेशवादी इतिहास की परिपाटी बदलने के लिए जरूरी है कि एनसीईआरटी से लेकर उच्च शिक्षा तक के पाठ्यक्रम को तैयार करने वाले लोगों की सूची में नए लोगों को शामिल किया जाए। उदाहरण के तौर पर कहा कि काशी का इतिहास जितना बेहतर काशी के लोग लिखेंगे, उतना अच्छा कोई बाहरी व्यक्ति नहीं लिख सकता। मगर दुर्भाग्य है कि अब तक ऐसा हुआ नहीं हैं।
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यह बदलाव जल्द दिखने लगेगा। कहा कि इतिहास पुनर्लेखन पर चर्चा के लिए अगस्त महीने में काशी में ‘इतिहास लेखन के महिला स्रोत’ विषय पर वृहद परिचर्चा का आयोजन किया गया है। इस परिचर्चा में देश भर की 500 महिला इतिहासकार शामिल होंगी।
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रविवार की दोपहर भेलूपुर स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. बालमुकुंद ने कहा कि इतिहास का पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा अब तक जिनके पास रहा वे वामपंथी मानसिकता के लोग रहे हैं। यही वजह है कि आज इतिहास के नाम पर जो पढ़ाया जा रहा है वह पूरा सच नहीं है।
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अधूरा ज्ञान सबसे खतरनाक होता है। गुलामी का इतिहास नहीं अब युवा पीढ़ी क्रांतिकारियों की गौरव गाथा यानी वास्तविक इतिहास पढ़ेगी। कहा कि 22 और 23 अक्तूबर को कुशीनगर में इतिहास पुनर्लेखन पर परिचर्चा होगी। इसमें 500 से अधिक पुरुष इतिहासकार शामिल होंगे। इसी प्रकार 19-20 मार्च को युवा इतिहासकारों का सम्मेलन प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास संकलन समिति का मानना है कि उपनिवेशवादी इतिहास की परिपाटी बदलने के लिए जरूरी है कि एनसीईआरटी से लेकर उच्च शिक्षा तक के पाठ्यक्रम को तैयार करने वाले लोगों की सूची में नए लोगों को शामिल किया जाए। उदाहरण के तौर पर कहा कि काशी का इतिहास जितना बेहतर काशी के लोग लिखेंगे, उतना अच्छा कोई बाहरी व्यक्ति नहीं लिख सकता। मगर दुर्भाग्य है कि अब तक ऐसा हुआ नहीं हैं।