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सोनभद्र के 18 गांवों के जलस्रोत हुए जहरीले, मचा हड़कंप

Sun, 09 Apr 2017 05:00 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, अनपरा
ब्यूरो, अमर उजाला, अनपरा Updated Sun, 09 Apr 2017 05:00 PM IST
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The water sources of 18 villages of Sonbhadra became poisonous, stirred
water

प्रदेश की बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक कुलडोमरी (भाठ क्षेत्र) के अधिकांश जलस्रोत विषाक्त हो गए हैं। इस ग्राम पंचायत के 18 गांवों/मजरों के 517 हैंडपंपों के पानी की लैब रिपोर्ट के जरिए, सामने आए इस खुलासे ने हड़कंप मचा है।

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अधिकांश हैंडपंपों में नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा मिली है। ऐसे पानी के सेवन का सीधा मतलब है ब्लू बेबी सिंड्रोम, कैंसर जैसी बीमारियों को निमंत्रण। बावजूद अभी तक इस इलाके के बाशिंदों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कोई बड़ी परियोजना अमल में नहीं लाई जा सकी है।
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जल निगम की यूनिसेफ शाखा ने कुलडोमरी ग्राम पंयायत के डिबुलगंज, मेडऱदह, लोझरा, बेनादह, दुगोड़वा, मनरहवा, बैरपान, सिदहवा, लोड, डैनिया, डोडिय़ोपार, पडऱवा, हरिपुर, बीरनबहरा, खोडिय़ा, अमहवा, करहिया, गुलालीडीह गांव/मजरे के 517 हैंडपंपों की सैंपलिंग की थी।
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इसकी रिपोर्ट में आधे से अधिक हैंडपंपों में नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा (150 से 750 मिलीग्राम प्रति लीटर) पाई गई है। इसमें भी अधिकांश में यह मात्रा चार से पांच सौ मिलीग्राम है। जबकि भारतीय मानक ब्यूरो और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक यह मात्रा दस से 45 मिलीग्राम ही होनी चाहिए।

सामान्यतया नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा के लिए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग एवं मल-मूत्र के अत्यधिक स्राव को कारण माना जाता है, लेकिन यहां परिस्थिति अलग है। खतरा केंद्र नई दिल्ली के निदेशक दुन्नू राय पुराने जलस्रोतों के सूखने और औद्योगिक स्राव की भूजल में बढ़ती मात्रा को कारण मानते हैं है।

कुलडोमरी में हैंडपंपों के पानी से मिला नाइट्रेट

The water sources of 18 villages of Sonbhadra became poisonous, stirred
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कहा कि जलसोत की रिचार्जिंग जरूरी है, लेकिन ऐसा न होने से जलस्रोत सूखते जा रहे हैं। वहीं जल निगम यूनिसेफ के एक्सईएन दिनेश कुमार का कहना था कि उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के साथ ही प्रभावित एरिया में पाइपलाइन से पेयजल सप्लाई के लिए कार्ययोजना बनाकर भेजी गई है। नीति आयोग से मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। 

यह है अत्यधिक नाइट्रेट के खतरे

डिबुलगंज संयुक्त चिकित्सालय के प्रभारी डा. बीके सिंह बताते हैं कि बच्चों के शरीर में अत्यधिक नाइट्रेट की मात्रा पहुंचने से ब्ल्यू बेबी (गर्भ में रहने के दौरान पर्याप्त आक्सीजन न मिलने के कारण बचपन में ही दिल की बीमारी) का खतरा बढ़ जाता है।

वहीं बड़ों में इससे कैंसर का रोग बढ़ता। इसका सबसे बड़ा प्रभाव आंतों का कैंसर होता है। कई मामलों में यह ब्लैडर और गर्भाशय कैंसर भी बन जाता है।

 

पानी में अत्यधिक नाइट्रेट की मात्रा मानव स्वास्थ्य के सही नहीं हैं। चूंकि जल निगम की रिपोर्ट उन्हें नहीं मिली है। इसलिए विभागीय स्तर पर सैंपलिंग कराकर स्थिति जांची जांएगी। प्रभावितों को राहत के लिए जो बन पड़ेगा, किया जाएगा।- गिरीशचंद्र वर्मा, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, सोनभद्र

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