फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   The third and fourth generations paid a heartfelt tribute to Ustad Bismillah Khan through the melodies of the shehnai.

Varanasi News: तीसरी-चौथी पीढ़ी ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को शहनाई की धुन से पेश की खिराज-ए-अकीदत

Fri, 21 Aug 2026 11:55 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
The third and fourth generations paid a heartfelt tribute to Ustad Bismillah Khan through the melodies of the shehnai.
वाराणसी में शुक्रवार को दरगाह ए फातमान में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर
वाराणसी। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 20वीं बरसी पर शुक्रवार को दरगाह-ए-फातमान स्थित उस्ताद के मकबरे पर उनके मुरीदों ने अकीदत पेश की। दरगाह पर गुलपोशी की गई तो उनके पैतृक आवास पर शहनाई की धुन से खिराज-ए-अकीदत पेश की गई। उनकी बरसी पर पहली बार उनके आवास पर तीसरी और चौथी पीढ़ी ने शहनाई बजाई। उनके पोते और परपोतों ने जब उस्ताद की चर्चित बंदिशें शहनाई पर बजाईं तो हर किसी ने उस्ताद को नमन करते हुए उनकी बढ़ती विरासत पर खुशी जताई।
विज्ञापन

शुक्रवार को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के दरगाह-ए-फातमान स्थित मकबरे पर सुबह कुरानख्वानी और दुआख्वानी हुई। उनके परिवार के अलावा कुछ कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के पुत्र शांतनु राय ने मकबरे पर पुष्प चढ़ाकर नमन किया। इस दौरान उस्ताद के साथ पांच दशक तक दुक्कड़ पर संगतकार रहे बसारत हुसैन के बेटे जाकिर हुसैन और उस्ताद के पोते आफाक हैदर ने शहनाई पर मातमी धुन पेश की। उन्होंने उस्ताद के चर्चित नौहे मारा गया तीर से बच्चा रबाब का..., रो-रो के कहती थी जहरा... की धुन जब शहनाई पर पेश की तो सभी की आंखें नम हो गईं। मकबरे पर दोपहर तक उनके चाहने वाले पहुंचकर गुलपोशी करते रहे।
विज्ञापन

वहीं, शाम को उस्ताद के हड़हासराय स्थित पैतृक आवास पर लंबे समय बाद विरासत-ए-बिस्मिल्लाह कार्यक्रम हुआ। जाकिर हुसैन के साथ उस्ताद के पोते अरशद अब्बास, परपोते गाजी अब्बास, जैन अब्बास और मोहम्मद हुसैन ने शहनाई पेश कर सांगीतिक नमन किया। उन्होंने उस्ताद की उन सभी बंदिशों को शहनाई पर साधा, जिसे वे देश-विदेश में बजाते थे। उनकी प्रसिद्ध धुन रघुपति राघव राजाराम... भी पेश किया। इसके बाद राग मधुवंती में तीनताल की बंदिश को विस्तार दिया। इसके बाद उस्ताद की पसंदीदा कजरी मिर्जापुर कईला गुलजार हो, कचौड़ी गली सून कइला बलमू... की धुन पेश की। दुक्कड़ पर मो. सैफ ने संगत की। संयोजन आफाक हैदर व शकील अहमद जादूगर ने किया। मकबरे पर अकीदत पेश करने वालों में शहनाई वादक महेंद्र प्रसन्ना, अजादार हुसैन, हादी हुसैन के अलावा उस्ताद की बेटी जरीना बेगम, पोती मिनहाज फातमा, शिफा, प्रमोद वर्मा आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

---

काशी को भारत रत्न दिलाने वाले उस्ताद को नेताओं-अधिकारियों ने भुला दिया
शहनाई के जरिये दुनिया भर में काशी को पहचान दिलाने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बरकी पर उनके मकबरे पर कोई अधिकारी व नेता नहीं पहुंचा। आफाक हैदर ने कहा कि जब दादा जी थे तो देशभर के नेता और नामचीन लोग उनसे मिलने के लिए परेशान रहते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed