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Ropeway Varanasi: 15 अगस्त को रोपवे के चालू होने की उम्मीद, ट्रॉली कार की टेस्टिंग जारी; सुरक्षा की गहन जांच
Sat, 30 May 2026 10:39 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2026 10:39 AM IST
सार
वाराणसी में 15 अगस्त को रोपवे के चालू होने की उम्मीद है। इंजीनियरों के अनुसार ट्रॉली कार टेस्टिंग के जरिये सुरक्षा की गहन जांच की जाती है। इस प्रक्रिया में यदि निर्माण कार्य में कोई कमी पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक किया जाता है।
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Ropeway varanasi
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को काशी में रोपवे शुरू होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि टेस्टिंग का काम चल रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो 15 अगस्त को इसे चालू कर दिया जाएगा। इसके लिए ट्रॉली कार की टेस्टिंग की जा रही है। जिस दिन इसे शुरू किया जाएगा, उस दिन कैंट से गोदौलिया तक ट्रॉली कार चलेंगी।
इंजीनियरों के अनुसार टेस्टिंग के जरिये सुरक्षा की गहन जांच की जाती है। इस प्रक्रिया में यदि निर्माण कार्य में कोई कमी पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक किया जाता है। यह टेस्टिंग एक बार नहीं, बल्कि कम से कम चार बार दोहराई जाती है, ताकि परियोजना को जनता के लिए पूरी तरह सुरक्षित रूप में शुरू किया जा सके। इससे भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कतें नहीं आती हैं।
रोपवे के 148 गंडोला 1302.4 क्विंटल वजन के साथ कैंट से रथयात्रा होते हुए गोदौलिया तक चलेंगे। इसका परीक्षण लगातार किया जा रहा है। इसकी सुरक्षा को विश्वस्तरीय बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। टेस्टिंग के दौरान प्रत्येक ट्रॉली कार में औसतन 10 यात्रियों का वजन (लगभग 800 किलो) और 10 प्रतिशत अतिरिक्त वजन मिलाकर कुल 880 किलो को ध्यान में रखकर परीक्षण किया जा रहा है।
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60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने या मौसम बिगड़ने की स्थिति में भी रोपवे पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि हवा का दबाव अधिक होने पर इसे कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। रोपवे कॉरिडोर के दोनों ओर 8 मीटर के दायरे में भवनों की अधिकतम ऊंचाई 10 मीटर निर्धारित की गई है। कुल 16 मीटर चौड़े इस क्षेत्र में इससे ऊंचे निर्माण प्रतिबंधित हैं।
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इंजीनियरों के अनुसार टेस्टिंग के जरिये सुरक्षा की गहन जांच की जाती है। इस प्रक्रिया में यदि निर्माण कार्य में कोई कमी पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक किया जाता है। यह टेस्टिंग एक बार नहीं, बल्कि कम से कम चार बार दोहराई जाती है, ताकि परियोजना को जनता के लिए पूरी तरह सुरक्षित रूप में शुरू किया जा सके। इससे भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कतें नहीं आती हैं।
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रोपवे के 148 गंडोला 1302.4 क्विंटल वजन के साथ कैंट से रथयात्रा होते हुए गोदौलिया तक चलेंगे। इसका परीक्षण लगातार किया जा रहा है। इसकी सुरक्षा को विश्वस्तरीय बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। टेस्टिंग के दौरान प्रत्येक ट्रॉली कार में औसतन 10 यात्रियों का वजन (लगभग 800 किलो) और 10 प्रतिशत अतिरिक्त वजन मिलाकर कुल 880 किलो को ध्यान में रखकर परीक्षण किया जा रहा है।
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60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने या मौसम बिगड़ने की स्थिति में भी रोपवे पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि हवा का दबाव अधिक होने पर इसे कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। रोपवे कॉरिडोर के दोनों ओर 8 मीटर के दायरे में भवनों की अधिकतम ऊंचाई 10 मीटर निर्धारित की गई है। कुल 16 मीटर चौड़े इस क्षेत्र में इससे ऊंचे निर्माण प्रतिबंधित हैं।
ट्रॉली कार में वेंटिलेशन की पूरी व्यवस्था
यूरोपीय मानकों के अनुसार सुरक्षा उपकरण लगाए जा रहे हैं। आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुरक्षा संरचना विकसित की गई है। जैसे मेट्रो के दरवाजे अंदर से नहीं खुलते, वैसे ही रोपवे के गंडोला के दरवाजे भी अंदर से नहीं खुलेंगे और ऑटोमेटिक तरीके से बंद हो जाएंगे। वेंटिलेशन की समुचित व्यवस्था की गई है, ताकि बिजली बाधित होने पर भी यात्रियों को असुविधा न हो।
इसे भी पढ़ें; Azamgarh News: मदरसे की मान्यता में फर्जीवाड़े का शक, नोटिस जारी कर सात दिन में मांगा गया जवाब
रथयात्रा इंटरमीडिएट तो गिरजाघर तकनीकी स्टेशन
यह एशिया का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट है, जिसे काशी में शुरू किया गया है। कुल 3.8 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक यात्रा होगी। बीच में काशी विद्यापीठ और रथयात्रा इंटरमीडिएट स्टेशन होंगे, जबकि गिरजाघर एक तकनीकी स्टेशन है। इस प्रकार कुल पांच स्टेशन और 29 टावर बनाए गए हैं। परियोजना की कुल लागत 815.58 करोड़ रुपये है, जिसमें 15 वर्षों का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल है।
यूरोपीय मानकों के अनुसार सुरक्षा उपकरण लगाए जा रहे हैं। आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुरक्षा संरचना विकसित की गई है। जैसे मेट्रो के दरवाजे अंदर से नहीं खुलते, वैसे ही रोपवे के गंडोला के दरवाजे भी अंदर से नहीं खुलेंगे और ऑटोमेटिक तरीके से बंद हो जाएंगे। वेंटिलेशन की समुचित व्यवस्था की गई है, ताकि बिजली बाधित होने पर भी यात्रियों को असुविधा न हो।
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रथयात्रा इंटरमीडिएट तो गिरजाघर तकनीकी स्टेशन
यह एशिया का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट है, जिसे काशी में शुरू किया गया है। कुल 3.8 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक यात्रा होगी। बीच में काशी विद्यापीठ और रथयात्रा इंटरमीडिएट स्टेशन होंगे, जबकि गिरजाघर एक तकनीकी स्टेशन है। इस प्रकार कुल पांच स्टेशन और 29 टावर बनाए गए हैं। परियोजना की कुल लागत 815.58 करोड़ रुपये है, जिसमें 15 वर्षों का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल है।