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विभागाध्यक्ष ने छात्रों के सिर फोड़ा ठीकरा, जांच पर टिकी निगाहें
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बीएचयू में उर्दू विभाग में वेबिनार के जिस पोस्टर पर अल्लामा इकबाल की तस्वीर को लेकर विवाद शुरू हुआ है, उस पर विभागाध्यक्ष अब पूरा ठीकरा छात्रों पर फोड़ रहे हैं। छात्रों द्वारा पोस्टर तैयार करने वाला विभागाध्यक्ष का बयान ही अब सवालों के घेरे में आ गया है। ये बात समझ से परे है कि वेबिनार का पोस्टर तैयार कर उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया गया और विभागाध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी को इसकी भनक तक नहीं लगी। ऐसे में अब सबकी निगाहें जांच और कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जो कार्रवाई होगी वो तो होगी ही लेकिन मामले में जो विवाद शुरू हुआ है, उसके पीछे लापरवाही ही मुख्य वजह मानी जा रही है। यह भी है कि छोटी सी लापरवाही ने बीएचयू प्रशासन की किरकिरी करा दी। वहीं, इस पूरे मामले में विभागाध्यक्ष बहुत कुछ बोलने से बच रहे हैं। हालांकि, बुधवार को विभागाध्यक्ष ने बातचीत में इतना जरूर बताया कि अल्लामा इकबाल के जिस पोस्टर पर हंगामा मचा है, उसे छात्रों ने तैयार किया और पोस्टर कैसा बना उस पर किसकी तस्वीर है, क्या लिखा है, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता था।
छात्रों से पूछताछ कर सकती है जांच कमेटी
विश्वविद्यालय में नौ नवंबर को उर्दू विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार पर बवाल मचा है। अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. केएम पांडेय की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि उर्दू विभागाध्यक्ष का बयान दर्ज करने के साथ ही पोस्टर तैयार करने वाले छात्रों से भी जांच कमेटी पूछताछ कर सकती है। इधर, बुधवार को परिसर में पोस्टर विवाद को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। अब सभी को जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है।
छात्रों का आरोप नहीं हुआ कुलगीत, ट्वीट कर सफाई
उर्दू विभाग में वेबिनार के पोस्टर पर महामना की तस्वीर न होने के विवाद के बाद ही वेबिनार में कुलगीत नहीं गाने का छात्रों ने आरोप लगाया। जिसके बाद कला संकाय प्रमुख के ट्विटर हैंडल से उर्दू विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार का एक मिनट का वीडियो अपलोड किया गया। इसमें उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी सहित अन्य महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते और विद्यार्थी कुलगीत गाते दिख रहे हैं।
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विभागाध्यक्ष बोले, जांच कमेटी को बताएंगे सच्चाई
उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी का कहना है कि जांच कमेटी को पूरी सच्चाई बताएंगे। पोस्टर पर विवाद की जानकारी के बाद उस पर तुरंत महामना की तस्वीर भी लगवा दी गई। जहां तक कुलगीत न गाए जाने की बात उठी है तो लोगों को यह जानना चाहिए कि उर्दू विभाग भी विश्वविद्यालय का अंग है। हर बार की तरह मंगलवार को भी कुलगीत गाया गया।
पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाते हैं इकबाल
उर्दू विभाग में अल्लामा इकबाल के पोस्टर को लेकर विवाद शुरू हुआ है, उनके बारे में छात्र पाठ्यक्रम में पढ़ते हैं। उर्दू विभागाध्यक्ष ने बताया कि बीए और एमए के पाठ्यक्रम में छात्र इकबाल को पढ़ते हैं, ऐसे में उर्दू के शायर अल्लामा इकबाल को लेकर जो लोग आपत्ति जता रहे हैं, उस पर कुछ भी कहना ठीक नहीं है। केवल उर्दू ही नहीं हिंदी विभाग में भी शायर के बारे में पढ़ाई होती है।
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छात्रों से पूछताछ कर सकती है जांच कमेटी
विश्वविद्यालय में नौ नवंबर को उर्दू विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार पर बवाल मचा है। अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. केएम पांडेय की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि उर्दू विभागाध्यक्ष का बयान दर्ज करने के साथ ही पोस्टर तैयार करने वाले छात्रों से भी जांच कमेटी पूछताछ कर सकती है। इधर, बुधवार को परिसर में पोस्टर विवाद को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। अब सभी को जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है।
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छात्रों का आरोप नहीं हुआ कुलगीत, ट्वीट कर सफाई
उर्दू विभाग में वेबिनार के पोस्टर पर महामना की तस्वीर न होने के विवाद के बाद ही वेबिनार में कुलगीत नहीं गाने का छात्रों ने आरोप लगाया। जिसके बाद कला संकाय प्रमुख के ट्विटर हैंडल से उर्दू विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार का एक मिनट का वीडियो अपलोड किया गया। इसमें उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी सहित अन्य महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते और विद्यार्थी कुलगीत गाते दिख रहे हैं।
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विभागाध्यक्ष बोले, जांच कमेटी को बताएंगे सच्चाई
उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी का कहना है कि जांच कमेटी को पूरी सच्चाई बताएंगे। पोस्टर पर विवाद की जानकारी के बाद उस पर तुरंत महामना की तस्वीर भी लगवा दी गई। जहां तक कुलगीत न गाए जाने की बात उठी है तो लोगों को यह जानना चाहिए कि उर्दू विभाग भी विश्वविद्यालय का अंग है। हर बार की तरह मंगलवार को भी कुलगीत गाया गया।
पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाते हैं इकबाल
उर्दू विभाग में अल्लामा इकबाल के पोस्टर को लेकर विवाद शुरू हुआ है, उनके बारे में छात्र पाठ्यक्रम में पढ़ते हैं। उर्दू विभागाध्यक्ष ने बताया कि बीए और एमए के पाठ्यक्रम में छात्र इकबाल को पढ़ते हैं, ऐसे में उर्दू के शायर अल्लामा इकबाल को लेकर जो लोग आपत्ति जता रहे हैं, उस पर कुछ भी कहना ठीक नहीं है। केवल उर्दू ही नहीं हिंदी विभाग में भी शायर के बारे में पढ़ाई होती है।