टेंट सिटी पर बोले जस्टिस: एक रात रुकने का किराया 40 हजार, इतनी तो क्षमता हमारी भी नहीं, फिर कैसे जुड़ रहा आदमी
एनजीटी ने एनएमसीजी और बाकी मशीनरी से यह भी कहा कि गंगा नदी से जुड़े जो भी दिशा-निर्देश हैं, उनसे संबंधित जवाब तीन सप्ताह में दाखिले करें। इस मामले में 15 दिन में फैसला लेंगे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से का पक्ष रखा। एनजीटी ने गंगा बाढ़ के मैदानी क्षेत्र के सीमांकन का संपूर्ण ब्योरा भी तीन सप्ताह में तलब किया है।
विस्तार
टेंट सिटी मामले में सुनवाई के दौरान वीडीए के अधिवक्ता ने एनजीटी की पीठ से कहा कि अस्थायी तौर पर जनवरी से मई तक रहता है। यह सांस्कृतिक उद्देश्य से लोगों को जोड़ने के लिए है। इस पर एनजीटी ने तल्ख टिप्पणी की और कहा कि इसमें आम आदमी कहां है? न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा जिस जगह पर एक रात रुकने की कीमत 40 हजार रुपये हो, वह जगह एक आम आदमी से कैसे जुड़ रही है। इतना खर्च करने की क्षमता तो हमारी भी नहीं है। जब हम जैसे लोग यह खर्च वहन नहीं कर सकते तो आम आदमी का सवाल ही नहीं उठता। एनजीटी की पीठ ने कहा कि अंतरिम तौर पर टेंट सिटी के निर्माण पर रोक लगा रहे हैं। इसपर वीडीए के अधिवक्ता ने कहा कि अनुमति के बगैर टेंट सिटी का निर्माण नहीं करेंगे।
कछुआ सेंचुरी क्यों हटाई?
एनजीटी ने कहा कि गंगा के तल में टेंट सिटी का निर्माण कैसे हो सकता ? इस प्रकार के निर्माण से नदी धारा की आकृति व वहां रहने वाले जीवों को गंभीर खतरा है। टेंट सिटी वाले गंगा भाग के आसपास कछुआ सेंचुरी बनाई गई, फिर इसे डिनोटिफाइड किया गया। इससे क्या कछुए कहां चले गए ? कछुआ (सेंचुरी) घोषित क्षेत्र को डिनोटिफाइड कैसे किया जा सकता है? क्या कछुओं पारिस्थितिकी के बारे में कोई जानकारी है।
वीडीए के जवाब पर एनएमसीजी की आपत्ति
वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के अधिवक्ता ने कहा कि हमें टेंट सिटी संचालन की अनुमति मिल गई है। इस पर एनएमसीजी के अधिवक्ता ने आपत्ति जताई और कहा कि टेंट सिटी बसाने की अनुमति नहीं दी गई है। एनएमसीजी के अधिवक्ता ने कहा इसपर अगले पंद्रह दिनों में फैसला लेंगे।
गंगा से जुड़े और मामलों की सुनवाई, ब्योरा तलब
एनजीटी ने एनएमसीजी और बाकी मशीनरी से यह भी कहा कि गंगा नदी से जुड़े जो भी दिशा-निर्देश हैं, उनसे संबंधित जवाब तीन सप्ताह में दाखिले करें। इस मामले में 15 दिन में फैसला लेंगे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से का पक्ष रखा। एनजीटी ने गंगा बाढ़ के मैदानी क्षेत्र के सीमांकन का संपूर्ण ब्योरा भी तीन सप्ताह में तलब किया है।
राज्य प्रदूषण बोर्ड ने नहीं दी थी संचालन की अनुमति
एडवोकेट सौरभ तिवारी ने बताया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने जो जवाब दाखिल किया है, उसमें कहा है कि टेंट सिटी बसाने के लिए एनओसी दी थी, लेकिन ऑपरेशन के लिए कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया था।
करीब चालीस करोड़ की आमदनी
जनवरी से जून 2023 के बीच टेंट सिटी का संचालन किया गया था। इस अवधि में करीब 26520 पर्यटक आए और टेंट सिटी में रुके। शादी समारोह के साथ ही कई तरह के आयोजन भी किए गए। रेस्टोरेंट का संचालन भी हुआ। विदेशी कलाकारों के कार्यक्रम भी कराए गए। इन सब आयोजनों से करीब 40 करोड़ से अधिक की आमदनी हुई है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
एक नजर
- जनवरी 2023: गंगा उसपार रेरी पर बसाई गई थी टेंट सिटी
- 15 करोड़ से वीडीए ने सीवर, पेयजल और बिजली के किए थे इंतजाम
- दो क्लस्टर में 240 टेंट लगाए गए थे
- न्यूनतम सात हजार और अधिकतम किराया था 50 हजार रुपये रोजाना
- लगभग छह महीने तक किया गया टेंट सिटी का संचालन
- गुजरात की दो कंपनियों को दिया गया था संचालन का जिम्मा