वाराणसीः प्रदूषण से खराब हो रही शहर की आबोहवा, येलो जोन में पहुंचा बनारस, एक्यूआई हुआ 120
होलिका दहन में अनेक जगहों पर प्लास्टिक की थैलियां, टायर, प्लास्टिक और फाइबर के फर्नीचर, प्लास्टिक पाइप व बोरियां भी जलाई गईं। इस कारण वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंचा।
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वाराणसी की आबोहवा की सेहत ढीली हो गई है। होलिका दहन के बाद से वातावरण में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार खराब बना हुआ है। रविवार को भी बनारस का एक्यूआई 120 दर्ज किया गया और शहर येलो जोन में बना रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार मलदहिया सबसे अधिक प्रदूषित इलाका रहा।
रविवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार मलदहिया का एयर क्वालिटी इंडेक्स 135, भेलूपुर का 129, अर्दली बाजार का 114 और बीएचयू का एक्यूआई 101 दर्ज किया गया। वहीं, आईक्यू एयर की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार शनिवार को बनारस देश के चौथा सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा।
वहीं शुक्रवार को वायु प्रदूषण के मानक पीएम 2.5 का स्तर 300 माइक्रो ग्राम घन मीटर के पार हो गया था। एक मार्च से 17 मार्च के बीच बनारस वायु प्रदूषण की दृष्टि से ग्रीन और येलो जोन में चल रहा था। होलिका दहन के बाद शुक्रवार सुबह के बीच जांचे गए प्रदूषण के हिसाब से शहर ऑरेंज जोन में पहुंच गया। होलिका दहन में अनेक जगहों पर प्लास्टिक की थैलियां, टायर, प्लास्टिक और फाइबर के फर्नीचर, प्लास्टिक पाइप व बोरियां भी जलाई गईं। इस कारण वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंचा।
12 मार्च तक 100 के आसपास रहा एक्यूआई
मलदहिया में एक मार्च को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 79, भेलूपुर में 92, बीएचयू में 66 और अर्दली बाजार में 90 था। 13 मार्च को इन स्टेशनों पर एक्यूआई क्रमश: 92, 98, 73 व 96 दर्ज किया गया। दो मार्च से 12 मार्च के बीच एक्यूआई 100 के आसपास ही बना रहा। पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर भी 134 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा नहीं पहुंचा।