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दस दिन में खपा दिए 35 करोड़ के सॉइल्ड नोट

Thu, 24 Nov 2016 02:10 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी Updated Thu, 24 Nov 2016 02:10 AM IST
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Ten days to absorb the 35 million Soild notes
बैंक के बाहर लगी ग्राहकों की कतार।
500-1000 के नोट बंद करने के सरकार के फैसले के बाद बैंकों-डाकघरों में नगदी का प्रवाह बनाए रखना आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हालात संभालने के लिए करेंसी चेस्ट से सॉइल्ड नोट की गड्डियां वापस चलन में ला दी गई हैं। मटमैले, गंदे हो चुके ये नोट बिल्कुल रद्दी हालत में हैं। जगह-जगह जले, कटे और फटे होने के साथ ही ये नोट हाथ में आने के बाद केमिकल और गंदगी के चलते खुजली आदि बीमारियां पैदा कर रहे हैं। ये वो नोट हैं जिन्हें नष्ट कर उनकी जगह नई करेंसी जारी करने के लिए आरबीआई को भेजा जाता है। दस दिन में अकेले वाराणसी में 30 से 35 करोड़ के सॉइल्ड नोट खपाए जा चुके हैं।
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नोटबंदी के बाद से छाए नगदी संकट के मद्देनजर पी विजय कुमार चीफ जनरल मैनेजर, मुद्रा प्रबंध विभाग, आरबीआई के हवाले से 13 नवंबर को जारी पत्र के बाद बैंकों ने यह कदम उठाया है। इससे स्थिति तो नहीं सुधरी, अलबत्ता ग्राहकों के लिए एक और मुसीबत खड़ी हो गई। बैंकों में तीन से चार घंटे लाइन में लगने के बाद जब लोग 100, 50, 20 और 10 रुपये की गड्डी लेकर बाहर आ रहे हैं तो उनमें आधे से अधिक नोट ऐसे निकल रहे हैं, जिन्हें लेने वाला कोई नहीं। वजह, जगह-जगह गल चुके ये नोट जेब में रखना तो छोड़िए,  हाथ में लेने लायक भी नहीं हैं। बैंक वाले खुद ऐसे नोट बदलने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में शहर से गांवों तक रोजाना ऐसे नोटों को बदलने के लिए नोकझोंक और हंगामा हो रहा है।
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करेंसी चेस्ट से निकलकर बैंक और वहां से लोगों के हाथों में। लंबे समय से चलन में होने के नाते खराब हो चुके सॉइल्ड नोट आरबीआई को वापस भेजे जाते हैं। आरबीआई तक पहुंचने से पहले इन्हें करेंसी चेस्ट में केमिकल के जरिये सुरक्षित रखा जाता है। अब जब बैंकों, डाकघरों से वापस ये नोट लोगों के हाथ आ रहे हैं तो बीमारियां पैदा कर रहे हैं। इसके केमिकल और गंदगी के असर से हथेलियों और चेहरे पर खुजली होने के साथ छोटे-छोटे लाल-भूरे दाने निकलने लग रहे हैं। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. प्रेमनारायण सिंह ने बताया कि 14 नवंबर को बैंक से उन्हें 50 रुपये के नोट की गड्डी मिली, उसमें अधिकतर नोट जगह-जगह गल चुके थे। अजीब दुर्गंध भी आ रही थी। कुछ देर बाद हथेली में खुजली होने लगी, फिर हाथ चेहरे पर गया तो वहां भी खुजली शुरू हो गई। चिकित्सक से दवा ली तब राहत मिली। गोदौलिया स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में तैनात एक महिला कर्मचारी भी ऐसे नोटों के चलते परेशान हुई। उसके हाथ और चेहरे पर खुजली होने लगी।
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