सोनभद्र में मृत मिले कौवों में नहीं मिले बर्ड फ्लू के लक्षण, जानें चिकन के बारे में टीम ने क्या कहा
पशुपालन विभाग विंध्याचल मंडल के अपर निदेशक डॉ. राजीव गुप्ता ने शुक्रवार को सोनभद्र के डाला में जहां कौवे मृत मिले थे, उस स्थान का निरीक्षण किया। आसपास के लोगों से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि मृत कौवों में बर्ड फ्लू के लक्षण नहीं मिले हैं। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को दूसरे प्रांतों से आ रहे चिकन व अंडों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था करने और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। रैपिड रिस्पांस टीम को अलर्ट मोड पर रहने की हिदायत दी।
अपर निदेशक ने डाला क्षेत्र के डाला चढ़ाई, चूड़ीगली, बारी, पुलिस चौकी परिसर स्थित हनुमान मंदिर व सोन नदी के किनारे सहित अन्य स्थानों का निरीक्षण किया। डाला चौकी प्रभारी सरीमन सोनकर से बातचीत की। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके श्रीवास्तव को निर्देश दिया कि वे जिले की सीमा से सटे मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार से चिकन व अंडों के आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। डीएम की अध्यक्षता में पीडब्ल्यूडी, नगर पालिका, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग व अन्य संबंधित विभागों की बैठक कराकर बर्ड फ्लू से बचाव के लिए टैमी फ्लू दवा का स्टाक रखने व अन्य तैयारी का निर्देश दिया।
चिकन को उबाल कर खाने की अपील
टीम ने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे कच्चा चिकन न खाएं। चिकन को उबाल कर खाने से बर्ड फ्लू नहीं होता। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि डाला क्षेत्र में मृत मिले 10 कौवों का तीन चिकित्सकों के पैनल से चोपन में पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में बर्ड फ्लू के लक्षण नहीं मिले हैं। कौवों के सैंपल जांच के लिए भोपाल लैब भी भेजे गए हैं। वहां की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
बर्ड फ्लू का खतरा किसे अधिक?
- मुर्गी पालन से जुड़े लोगों को बर्ड फ्लू का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले लोगों, संक्रमित जगहों पर जाने वाले लोगों, कच्चा या अधपका चिकन या अंडा खाने वाले लोगों को भी इससे संक्रमित होने का खतरा रहता है।
- खांसी (आमतौर पर सूखी खांसी)
- गले में खराश, बंद नाक या नाक बहना
- थकान, सिरदर्द
- ठंड लगना, तेज बुखार
- जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द
- नाक से खून बहना
- सीने में दर्द
इंसानों के लिए भी खतरनाक है यह बीमारी
- बर्ड फ्लू एक ऐसी बीमारी है, जो सिर्फ पक्षियों को ही नहीं, बल्कि जानवरों और इंसानों के लिए भी उतना ही खतरनाक है। इस बीमारी से संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले जानवर और इंसान आसानी से इससे संक्रमित हो जाते हैं। इससे मौत भी हो सकती है।
इंसान कैसे हो जाते हैं इससे संक्रमित?
- बर्ड फ्लू को एवियन इंफ्लूएंजा के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रकार का वायरल इंफेक्शन (संक्रमण) होता है। वैसे तो बर्ड फ्लू कई प्रकार हैं, लेकिन एच5एन1 (H5N1)पहला ऐसा बर्ड फ्लू वायरस था, जिसने पहली बार इंसान को संक्रमित किया था। इसका पहला मामला साल 1997 में हांगकांग में सामने आया था। यह बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाले पानी के संपर्क में आने से इंसानों में होती है।