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काशी के संत की मांग: ज्ञानवापी परिसर के आसपास प्रतिबंधित हो गैर हिंदुओं का प्रवेश, खत्म किया जाए स्पेशल प्रोविजन एक्ट 1991

Mon, 16 May 2022 07:45 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 16 May 2022 07:45 PM IST
सार

ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी परिसर के आसपास गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाए। 

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Swami Jitendranand Saraswati demand entry of non Hindus should be banned in Gyanvapi masjid complex and abolished  Special Provision Act 1991
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद मांग की है कि परिसर के आसपास गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाए। सर्वे के दौरान जो शिवलिंग मिला है, वह स्वयंभू बाबा विश्वनाथ हैं। काशी का कण-कण शंकर हैं और एक-एक व्यक्ति बाबा विश्वनाथ के इस शिवलिंग के मिलने से बेहद प्रसन्न है।

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अखिल भारतीय संत समिति प्रदेश सरकार से यह मांग करती है कि तत्काल अब उस परिसर में उस हौदे के आसपास गैर हिंदू का प्रवेश वर्जित किया जाए क्योंकि यह स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है। यह शिवलिंग नीचे कितनी गहराई तक है, इसका अंदाजा तो बेसमेंट टूटने के बाद ही पता चलेगा।
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बाबा के प्रकट होने से सनातनी हिंदू के मन में हर्ष है। अब किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है कि काशी का कण-कण शंकर हैं। कहा कि धारा 370 हटाई जा सकती है। कृषि कानून को किसानों के हित के लिए वापस लिया जा सकता है तो फिर स्पेशल प्रोविजन एक्ट 1991 को वापस लेकर काशी विश्वनाथ के मुक्ति का रास्ता क्यों नहीं साफ किया जा सकता है।

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ज्ञानवापी सर्वे में दावा: नंदी के सामने मिला शिवलिंग

Swami Jitendranand Saraswati demand entry of non Hindus should be banned in Gyanvapi masjid complex and abolished  Special Provision Act 1991
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे का काम पूरा - फोटो : अमर उजाला

ज्ञानवापी परिसर में अदालत के आदेश पर चल रही कमीशन की कार्यवाही के तीसरे दिन सोमवार को परिसर के वजूखाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया। इसके बाद वादी पक्ष के वकील हरिशंकर जैन की अपील पर सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने नंदी के सामने शिवलिंग वाली जगह को सील करने का आदेश दिया।

अदालत ने उस स्थान को संरक्षित व सुरक्षित रखने की पूरी जिम्मेदारी जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और सीआरपीएफ के कमांडेंट की तय की है। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को इसकी निगरानी करने का भी आदेश दिया गया है। इस बीच, मुस्लिम पक्ष ने शिवलिंग मिलने के दावे से इनकार किया है।

संत समाज में खुशी की लहर

पातालपुरी मठ के महंत बालक दास ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में चल रही सर्वे की कार्रवाई के बाद जो सबूत मिले हैं सनातन धर्मावलंबियों के पक्ष में ही हैं। हमारा जो दावा था वह हकीकत में अब सभी के सामने आ रहा है। इससे संत समाज में खुशी की लहर है। जब तक जांच पूरी ना हो जाए तब परिसर में किसी को प्रवेश ना दिया जाए। 

सतुआ बाबा महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर दुनिया के सामने सच सामने आ गया है कि वास्तव में सनातन धर्म के इतिहास को कैसे दबाया गया। शिवलिंग का दर्शन निश्चित रूप से संपूर्ण विश्व के लिए संदेश है। 

अंतरराष्ट्रीय हिंदू महासभा के प्रदेश महासचिव संपूर्णानंद पांडेय ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि  सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला है। हमारी सरकार से मांग है कि वह हिंदू धर्मावलंबियों के लिए पूजन-पाठ का इंतजाम करें। शिवलिंग मिलने के बाद ज्ञानवापी को लेकर फैलाए गए झूठ का भी पर्दाफाश हो चुका है। सर्वे की तीन दिन की कार्यवाही के दौरान जो भी तथ्य और साक्ष्य मिले हैं वह बताने के लिए काफी हैं कि यहां पर मंदिर था।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत  डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि शिव ही सत्य हैं और इसके अलावा जगत में दूसरा कोई सत्य नहीं है। परिसर में जो साक्ष्य मिले हैं वह बताने के लिए काफी हैं। ऐसे में सभी को धैर्य के साथ मसले को हल करना चाहिए। बनारस के लोगों को अपनी गंगा जमुनी तहजीब को बनाए रखते हुए ज्ञानवापी के मामले में आपस में मिल जुलकर निर्णय लेना चाहिए। 

अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद मांग की है कि परिसर के आसपास गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाए।
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