सुल्तानपुर सड़क हादसा: शव पहुंचते ही बनारस के खरगूपुर और रूपापुर में मचा कोहराम, घटना से हर कोई रहा गमगीन
सुल्तानपुर में सड़क हादसे में मृतकों का शव भोर में पहुंचते ही वाराणसी के खरगूपुर और रूपापुर में कोहराम मच गया। रातभर परिजन बदहवास स्थित में थे। आसपास के लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे थे।
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सुल्तानपुर में सड़क हादसे में मृतकों का शव भोर में पहुंचते ही वाराणसी के खरगूपुर और रूपापुर में कोहराम मच गया। रातभर परिजन बदहवास स्थित में थे। आसपास के लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। हर कोई घटना से गमगीन था। जंसा थाना अंतर्गत खरगूपुर निवासी अखिलेश मिश्रा, विकास मिश्रा और कुत्थन राजभर और मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के रूपापुर के कैलाश शुक्ला की बृहस्पतिवार रात सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
खरगूपुर गांव के निवासी और दवा कारोबारी अखिलेश मिश्र की मौत ने परिवार को झकझोर दिया। दो भाइयों में सबसे बड़े अखिलेश दो बच्चों के पिता थे। उनकी पत्नी नीलम मिश्रा व मां सरस्वती देवी अचेतावस्था में ही हैं। वहीं इकलौते बेटे विकास मिश्र की मौत ने माता-पिता को बेसुध कर दिया है।
इंदौर स्थित एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्यरत विकास का एक पुत्र है। पत्नी प्रीति मिश्रा बार-बार बेहोश जा रही है। गांव के ही छोटेलाल उर्फ कूत्थन राजभर तीन भाइयों में सबसे छोटा था। कुत्थन के तीन पुत्र हैं। पत्नी राधा देवी व माता बाची देवी बेसुध रहीं। कुत्थन मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था।
बृहस्पतिवार को सेवापुरी के पूर्व ब्लाक प्रमुख डॉ. तेग बहादुर सिंह के साथ यह सभी लखनऊ गए थे। लौटते समय हादसा हुआ था। इस हादसे में चार की मौत हो गई जबकि गांव के लक्ष्मण मिश्रा, दुर्गेश मिश्रा, राजू सिंह सहित दो अन्य का इलाज चल रहा है।
जन्मदिन के दिन ही हुई विकास की मौत, दोस्त अखिलेश आ रहा था साथ
खरगूपुर निवासी विकास मिश्रा का बृहस्पतिवार को जन्मदिन था। यही कारण रहा कि जन्मदिन मनाने के लिए अखिलेश मिश्रा भी लखनऊ से साथियों के साथ चल दिया था। हादसे में मृत अखिलेश लखनऊ में रहकर एमआर का काम करता था, अपने मित्र विकास मिश्र व गांव वालों को लखनऊ पहुंचने की सूचना पर उनसे मिलने चला गया। दोस्त विकास का जन्मदिन था, इसलिए विकास उसे जबरिया अपने साथ गांव ला रहा था। घर जल्द पहुंचने के लिए अखिलेश ही गाड़ी चला रहा था। हादसे में दोनों दोस्त एक साथ दुनिया को अलविदा कह दिए।
परिजनों की बात नहीं माना विकास
मां-बाप का एकलौता पुत्र विकास के जन्मदिन की तैयारियां घर में चल रही थी। परिजन उसे लखनऊ जाने से मना भी किए लेकिन वह नहीं माना। बिलखते हुए परिजन यही कह रहे थे कि काश बात मान लिया होता तो यह दिन नहीं देखना पड़ता।