{"_id":"6a8b4cbf9d6dc13f9b0f29e6","slug":"sudamas-devotion-will-remain-immortal-forever-balvyas-varanasi-news-c-20-vns1056-1517115-2026-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुदामा की भक्ति चिरकाल तक रहेगी अमर : बालव्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुदामा की भक्ति चिरकाल तक रहेगी अमर : बालव्यास
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में श्रीकाशी सत्संग सेवा समिति की ओर से चल रही सप्ताहव्यापी श्रीमदभागवत कथा के सातवें दिन कथा रविवार को श्रवण कराते हए प्रख्यात कथा मर्मज्ञ पं. श्रीकांत शर्मा बालव्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण कभी नहीं रोये, उनसे उनका सबसे प्रिय ब्रज छूट गया। महाभारत के युद्ध में हजारों के शव देखें फिर भी श्रीकृष्ण की आंखों में आंसू नहीं आए।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण धोने शुरू किए, उनके पैरों में चुभे कांटे देखकर उनकी आंखों से अश्रुधारा प्रवाहित हो उठी। वे सुदामा की निष्काम भक्ति, निश्छल भाव से मोहित हो गए और उनको सर्वस्व प्रदान कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में आज भी श्रीकृष्ण सुदामा जैसी मित्रता की कमी नही है। सच्चे मित्रता की यही पहचान है, जिसमे मित्र में ईश्वर की छवि दिखलाई पड़े।
बालव्यास ने कहा कि विद्वान अपनी विद्वता का उपयोग धनार्जन के लिए नही करते हैं, बल्कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए करते है। सुदामा ने अपने ज्ञान का प्रयोग धनार्जन के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ अपने आराध्य को पाने के लिए किया। जिसका परिणाम यह है कि सुदामा चिरकाल तक इतिहास में अमर रहेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि राधा कृष्ण अलग अलग नही है, वे दोनों एक दूसरे की छाया ही है। जो राधा कृष्ण के स्वरूप की पूजा करता है, उस पर लक्ष्मी नारायण की असीम कृपा बरसती है। यह जीवन ईश्वर की कृपा से ही मिला है, इसे संवारना है तो भगवत भजन का ही रास्ता अपनाना चाहिए। भगवान ने कहा है कि उनको पाने का सबसे उत्तम मार्ग सत्संग है। कथा में उन्होंने श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह कथा का प्रसंग श्रवण कराया। व्यासपीठ की आरती यजमान ओम प्रकाश तुलस्यान, बैजनाथ भालोटिया, शुभम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल, किशन भालोटिया, उर्मिला सिंह, भरत संथोलिया आदि ने सपरिवार उतारी। कथा का समापन पर सोमवार को शुभम लॉन में सुबह 10 बजे से नर्वदेश्वर महादेव का सामूहिक रुद्राभिषेक होगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण धोने शुरू किए, उनके पैरों में चुभे कांटे देखकर उनकी आंखों से अश्रुधारा प्रवाहित हो उठी। वे सुदामा की निष्काम भक्ति, निश्छल भाव से मोहित हो गए और उनको सर्वस्व प्रदान कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में आज भी श्रीकृष्ण सुदामा जैसी मित्रता की कमी नही है। सच्चे मित्रता की यही पहचान है, जिसमे मित्र में ईश्वर की छवि दिखलाई पड़े।
विज्ञापन
बालव्यास ने कहा कि विद्वान अपनी विद्वता का उपयोग धनार्जन के लिए नही करते हैं, बल्कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए करते है। सुदामा ने अपने ज्ञान का प्रयोग धनार्जन के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ अपने आराध्य को पाने के लिए किया। जिसका परिणाम यह है कि सुदामा चिरकाल तक इतिहास में अमर रहेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि राधा कृष्ण अलग अलग नही है, वे दोनों एक दूसरे की छाया ही है। जो राधा कृष्ण के स्वरूप की पूजा करता है, उस पर लक्ष्मी नारायण की असीम कृपा बरसती है। यह जीवन ईश्वर की कृपा से ही मिला है, इसे संवारना है तो भगवत भजन का ही रास्ता अपनाना चाहिए। भगवान ने कहा है कि उनको पाने का सबसे उत्तम मार्ग सत्संग है। कथा में उन्होंने श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह कथा का प्रसंग श्रवण कराया। व्यासपीठ की आरती यजमान ओम प्रकाश तुलस्यान, बैजनाथ भालोटिया, शुभम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल, किशन भालोटिया, उर्मिला सिंह, भरत संथोलिया आदि ने सपरिवार उतारी। कथा का समापन पर सोमवार को शुभम लॉन में सुबह 10 बजे से नर्वदेश्वर महादेव का सामूहिक रुद्राभिषेक होगा।