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खुद हुए सफल, औरों को भी बनाया आत्मनिर्भर
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मशरुम खेती की तैयारी करते ज्योतिष सिंह।
- फोटो : MAU
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मऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्टार्ट अप इंडिया से प्रेरित होकर तमाम युवाओं ने खुद का रोजगार कर सफलता पाई है। इन्हीं लोगों में शहर के इमिलिया निवासी युवा सिविल इंजीनियर ज्योतिष सिंह भी शामिल हैं। उन्होंने नौकरी का विचार छोड़कर मशरूम की खेती शुरू की। अब वे प्रतिमाह 25 हजार का कारोबार करते हैं। उन्होंने अपने साथ 75 लोगों को जोड़कर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाया है।
ज्योतिष सिंह (30) ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2019 में मशरूम का उत्पादन शुरू किया और जनवरी 2020 में इसे आजीविका के रूप में अपना लिया। लॉकडाउन में उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत हुई तो मां से मिले अनुभवों से मशरूम के बिस्किट, जैम, जेली, अचार, पापड़, खीर आदि व्यंजन तैयार कर दिए। नायाब स्वाद व पोषक गुणों के कारण बाजार में मशरूम के उत्पादों को पसंद किया जाने लगा है। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती शुरू करने के बाद इस पर काफी अध्ययन किया। देश के प्रमुख संस्थानों और बडे़ उत्पादकों से जानकारी ली। अब तक 75 लोगों को मशरूम उत्पादन से जोड़ चुके हैं।
उन्होंने बताया कि मशरूम प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर है। इसकी प्रजातियां कई रोगों में औषधि का काम करती हैं। यह एक ऐसी सब्जी है जिसे सुखाकर काफी दिनों तक रखा जा सकता है। उपयोग के समय पानी में उबाल देने पर यह पुन: फूलकर पहले जैसा हो जाता है। खास बात यह है कि सुखाते समय यह विटामिन डी अवशोषित करता है, जो उबालने पर भी नष्ट नहीं होता।
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पैदावार पर निर्भर है कमाई
ज्योतिष सिंह ने बताया कि उनसे जुड़े अधिकतर लोग दस बाई दस के कमरे में मशरूम की खेती कर एक सीजन में तीस से पैंतीस हजार रुपये कमाते हैं। लाभ इस पर निर्भर करता है कि कौन कितने क्षेत्रफल में मशरूम की खेती करता है। फिलहाल वे प्रतिमाह 25 हजार रुपये का कारोबार करते हैं। मार्केटिंग का कार्य समूह की महिलाएं करती हैं।
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ज्योतिष सिंह (30) ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2019 में मशरूम का उत्पादन शुरू किया और जनवरी 2020 में इसे आजीविका के रूप में अपना लिया। लॉकडाउन में उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत हुई तो मां से मिले अनुभवों से मशरूम के बिस्किट, जैम, जेली, अचार, पापड़, खीर आदि व्यंजन तैयार कर दिए। नायाब स्वाद व पोषक गुणों के कारण बाजार में मशरूम के उत्पादों को पसंद किया जाने लगा है। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती शुरू करने के बाद इस पर काफी अध्ययन किया। देश के प्रमुख संस्थानों और बडे़ उत्पादकों से जानकारी ली। अब तक 75 लोगों को मशरूम उत्पादन से जोड़ चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि मशरूम प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर है। इसकी प्रजातियां कई रोगों में औषधि का काम करती हैं। यह एक ऐसी सब्जी है जिसे सुखाकर काफी दिनों तक रखा जा सकता है। उपयोग के समय पानी में उबाल देने पर यह पुन: फूलकर पहले जैसा हो जाता है। खास बात यह है कि सुखाते समय यह विटामिन डी अवशोषित करता है, जो उबालने पर भी नष्ट नहीं होता।
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पैदावार पर निर्भर है कमाई
ज्योतिष सिंह ने बताया कि उनसे जुड़े अधिकतर लोग दस बाई दस के कमरे में मशरूम की खेती कर एक सीजन में तीस से पैंतीस हजार रुपये कमाते हैं। लाभ इस पर निर्भर करता है कि कौन कितने क्षेत्रफल में मशरूम की खेती करता है। फिलहाल वे प्रतिमाह 25 हजार रुपये का कारोबार करते हैं। मार्केटिंग का कार्य समूह की महिलाएं करती हैं।