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काशी विद्यापीठः छात्रों की इन पाठ्यक्रमों में कम हुई रुचि, मेरिट के आधार पर होंगे दाखिले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 23 May 2018 05:07 PM IST
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा के 23 पाठ्यक्रमों में मेरिट से दाखिले होंगे। इन पाठ्यक्रमों में आवेदन कम आए हैं। इसमें एमए अर्थशास्त्र, इतिहास, उर्दू, संस्कृत से लेकर एमए सांख्यिकी तक शामिल हैं।
एमए उर्दू में 60 सीटें हैं जबकि आवेदन 57 ही हैं। इसी तरह एमए संस्कृत 115 सीट के लिए 71 आवेदन आए। यही नहीं काशी विद्यापीठ से बीएससी टेक्सटाइल एंड हैंडलूम, फैशन डिजाइनिंग और सिंगिंग और ड्रामा के डिप्लोमा कोर्स करने में अभ्यर्थियों ने अरुचि दिखाई है।
काशी विद्यापीठ में दाखिले के लिए 25 मई से परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। इस साल 23 पाठ्यक्रम ऐसे हैं जिनमें मेरिट से दाखिला होना है। कुछ ऐसे कोर्स हैं जिनमें सीट से कम आवेदन आए हैं तो कुछ ऐसे हैं जिसमें सीट से दोगुना आवेदन भी नहीं आ पाए हैं।
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स्नातकोत्तर में एमए उर्दू, संस्कृत, इतिहास, सांख्यिकी के अलावा दर्शन, गांधी दर्शन, संपोषी ग्रामीण विकास में सीट से कम आवेदन आए हैं, वहीं डिप्लोमा इन ड्रामा, डिप्लोमा इन सिंगिंग, पीजी डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग, पीजी डिप्लोमा इन एनजीओ मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन कर्मकांड में आवेदन कम आए हैं। रही बात उर्दू, संस्कृति, दर्शन, कर्मकांड की तो इन विषयों में पहले से ही छात्रों की संख्या कम ही होती है।
उधर, एमए सांख्यिकी, अर्थशास्त्र के अलावा फैशन डिजाइनिंग व टेक्सटाइल एंड हैंडलूम जैसे पाठ्यक्रम में कॅरियर की असीम संभावनाओं के बावजूद आवेदन कम आना चिंताजनक है। फैशन डिजाइनिंग व टेक्सटाइल हैंडलूम में दक्ष शिक्षकों की कमी के चलते अभ्यर्थियों ने रुचि कम दिखाई है।
वहीं छात्र एनआईएफटी, आईएनआईएफडी समेत फैशन डिजाइनिंग के तकनीकी संस्थानों से कोर्स करने को ज्यादा तरजीह देते हैं। यहां से कोर्स करने पर प्लेसमेंट और इंटर्नशिप का भी पूरा मौका मिलता है।
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एमए उर्दू में 60 सीटें हैं जबकि आवेदन 57 ही हैं। इसी तरह एमए संस्कृत 115 सीट के लिए 71 आवेदन आए। यही नहीं काशी विद्यापीठ से बीएससी टेक्सटाइल एंड हैंडलूम, फैशन डिजाइनिंग और सिंगिंग और ड्रामा के डिप्लोमा कोर्स करने में अभ्यर्थियों ने अरुचि दिखाई है।
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काशी विद्यापीठ में दाखिले के लिए 25 मई से परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। इस साल 23 पाठ्यक्रम ऐसे हैं जिनमें मेरिट से दाखिला होना है। कुछ ऐसे कोर्स हैं जिनमें सीट से कम आवेदन आए हैं तो कुछ ऐसे हैं जिसमें सीट से दोगुना आवेदन भी नहीं आ पाए हैं।
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स्नातकोत्तर में एमए उर्दू, संस्कृत, इतिहास, सांख्यिकी के अलावा दर्शन, गांधी दर्शन, संपोषी ग्रामीण विकास में सीट से कम आवेदन आए हैं, वहीं डिप्लोमा इन ड्रामा, डिप्लोमा इन सिंगिंग, पीजी डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग, पीजी डिप्लोमा इन एनजीओ मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन कर्मकांड में आवेदन कम आए हैं। रही बात उर्दू, संस्कृति, दर्शन, कर्मकांड की तो इन विषयों में पहले से ही छात्रों की संख्या कम ही होती है।
उधर, एमए सांख्यिकी, अर्थशास्त्र के अलावा फैशन डिजाइनिंग व टेक्सटाइल एंड हैंडलूम जैसे पाठ्यक्रम में कॅरियर की असीम संभावनाओं के बावजूद आवेदन कम आना चिंताजनक है। फैशन डिजाइनिंग व टेक्सटाइल हैंडलूम में दक्ष शिक्षकों की कमी के चलते अभ्यर्थियों ने रुचि कम दिखाई है।
वहीं छात्र एनआईएफटी, आईएनआईएफडी समेत फैशन डिजाइनिंग के तकनीकी संस्थानों से कोर्स करने को ज्यादा तरजीह देते हैं। यहां से कोर्स करने पर प्लेसमेंट और इंटर्नशिप का भी पूरा मौका मिलता है।