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Holi 2024: मात्र 11 लोगों से शुरू हुई मसान की होली में आज 5 लाख की भीड़, ले चुकी है वैश्विक स्वरुप
Fri, 22 Mar 2024 08:07 PM IST
अमन विश्वकर्मा
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Fri, 22 Mar 2024 08:07 PM IST
सार
Holi 2024: मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ दोपहर में मध्याह्न स्नान करने मणिकर्णिका तीर्थ पर आते हैं तत्पश्चात सभी तीर्थ स्नान करके यहां से पुण्य लेकर अपने स्थान जाते हैं और उनके वहां स्नान करने वालों को वह पुण्य बांटते हैं। रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना (विदाई) कराकर अपने धाम काशी लाते हैं।
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बाबा मसान नाथ की आरती करते अर्चक।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर 11 लोगों के साथ 2012 में शुरू हुई मसान की होली अब वैश्विक स्वरूप ले चुकी है। देश ही नहीं दुनिया भर के सैलानी काशी की इस अद्भुत होली को देखने के लिए ही सिर्फ बनारस आते हैं। मणिकर्णिका घाट पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं, पर्यटकों और विदेशी सैलानियों की भीड़ इस बात की गवाह है।
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रगंभरी एकादशी के दूसरे दिन आदितीर्थ मणिकर्णिका घाट पर होने वाली चिता भस्म की होली में राग और विराग के दर्शन एक साथ होते हैं। एक तरफ जलती चिताएं तो दूसरी ओर चिता भस्म लपेटे अघोरियों की टोली अबीर और गुलाल उड़ाकर मशान नाथ से आशीष लेती हैं। शहनाई की मंगल ध्वनि, अपनों से बिछड़े हुए लोगों का आर्तनाद और चिताओं के चारों ओर नृत्य करती हुई टोलियों का दृश्य देखकर हर कोई शिवोहम बनने को आतुर नजर आता है।
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मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ दोपहर में मध्याह्न स्नान करने मणिकर्णिका तीर्थ पर आते हैं तत्पश्चात सभी तीर्थ स्नान करके यहां से पुण्य लेकर अपने स्थान जाते हैं और उनके वहां स्नान करने वालों को वह पुण्य बांटते हैं।
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महाश्मशान नाथ सेवा समिति के उपाध्यक्ष संजय गुप्ता ने बताया कि 11 लोगों ने मिलकर 2012 में मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली का आयोजन किया था। आज 12 साल में स्थिति ऐसी हो गई है कि पांच लाख से अधिक की भीड़ उमड़ने लगी है और जगह कम पड़ गई है। व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि काशी में यह मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना (विदाई) कराकर अपने धाम काशी लाते हैं।
इसके दूसरे दिन वह अपने गणों के साथ मसान पर होली खेलते हैं। यह पारंपरिक उत्सव मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं के बीच मनाया जाता है। इस होली को देखकर और खेलकर लोग जीवन के शाश्वत सत्य से परिचित होते हैं।
लगाया जया-विजया और सोमरस का भोग
मसान की होली से पहले मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बाबा महाश्मशान नाथ और माता मशान काली (शिव शक्ति) की मध्याह्न आरती उतारी। बाबा को जया, विजया,मिष्ठान व सोमरस का भोग लगाया गया। इसके बाद बाबा व माता को चिता भस्म व नीला गुलाल चढाया।