अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन: BHU में तय होंगे देशभर के पंचांगों के मानक, व्रत-पर्व में नहीं होंगी विसंगतियां
बीएचयू में देशभर के पंचांगों के मानक तय होंगे। व्रत- पर्व में विसंगतियां नहीं होंगी। 20 से 22 मार्च तक बीएचयू में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन होगा। इस दौरान 200 से ज्यादा ज्योतिषाचार्य शोध प्रस्तुत करेंगे।
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बीएचयू से देश-दुनिया के पंचांगों का मानक तय होगा। व्रत और पर्व के साथ ही शगुन के कार्य में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए बीएचयू में पंचांग के गणितीय मानों का अध्ययन किया जाएगा। बीएचयू में 20 से 22 मार्च तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में 200 से ज्यादा ज्योतिषाचार्य और पंचांगकार पंचांगों के मानकीकरण पर काम करेंगे। कुंडली मिलान से शादी के शुभ-लाभ और ऐसा न होने से हो रहीं विसंगतियों पर आधारित शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
ये जानकारी मंगलवार को ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी और पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय ने बीएचयू के जनसंपर्क कार्यालय में पत्रकारों को दी। ज्योतिष सम्मेलन के संयोजक डॉ. सुभाष पांडेय, डॉ. सुशील कुमार गुप्ता व अन्य ज्योतिषाचार्यों ने भी पंचांगों को एक नियम के तहत लागू करने की बात दोहराई।
बताया कि सम्मेलन के मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा सहित रूस, भूटान समेत कई देशों के ज्योतिष विद्वान होंगे। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान में आयोजित सम्मेलन में पंचांगों में भेद क्यों हैं, किस व्यवस्था को स्वीकारा जाए, प्रचलित व्यवस्थाओं में सामंजस्य कैसे स्थापित किया जाए और सनातन धर्मानुकूल व्यवस्था के संरक्षण के लिए कौन सी शास्त्रीय व्यवस्था बनाई जाए, इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।
ये ज्योतिषाचार्य होंगे शामिल
सम्मेलन में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से प्रो. विजेंद्र शर्मा व प्रो. भारत भूषण मिश्र, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी, नीम का थाना राजस्थान से कौशल दत्त शर्मा, बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय व प्रो. कमलाकर त्रिपाठी, तिरुपति से प्रो. कृष्ण कुमार भार्गव, रूस की प्रमुख ज्योतिषाचार्य से डॉ. इरिना, हापुड़ से प्रो. वासुदेव शर्मा, उज्जैन से डॉ. उपेंद्र भार्गव, भोपाल से डॉ. गणेश त्रिपाठी, सोमनाथ मंदिर के डॉ. नित्यानंद ओझा समेत 200 से ज्यादा ज्योतिषाचार्य हिस्सा ले रहे हैं।
व्रत और त्योहारों की तारीखों में आ रहा अंतर
प्रो. पांडेय ने कहा कि सनातन की सभी व्यवस्था पंचांग पर आधारित है। प्राचीन काल में इसमें कोई विभिन्नता नहीं थी। लेकिन, वर्तमान दौर और सिद्धांत भेद के चलते ग्रहों के गणितीय मान और उससे बनने वाली तिथियों और दिनों में भी अंतर दिखने लगा। इस वजह से व्रत और त्योहारों की तिथियों के निर्णय पर असर पड़ रहा है। इससे समाज में भ्रम की स्थिति बन रही थी। ऐसे में देशभर के ज्योतिषाचार्यों और पंचांगकारों की जिम्मेदारी हो जाती है कि इस स्थिति से निपटा जाए।
प्रो. पांडेय ने बताया कि सम्मेलन के अंतिम दिन हम इस पर भी मंथन करेंगे कि बीते कुछ साल में पंचांगों की एकरूपता को लेकर उठाए गए कदम पर कितना काम हुआ। पंचांग निर्माण की व्यवस्था सबीज होगी या निर्बीज इस पर मंथन होगा। सबीज का अर्थ है कि बाहर से डेटा कलेक्ट कर पंचांग बना लिया गया हो और किसी पारंपरिक ग्रंथ को नहीं पढ़ा गया हो। वहीं, निर्बीज में सूर्य सिद्धांत और शास्त्रों के अध्ययन के तहत पंचांग तय होते हैं।
कुंडली आधारित विवाह अनुकूलता का एक आधार स्तंभ
मुहूर्त की तरह कुंडली से गुण-दोषों को भी मिलाना बहुत जरूरी है। जबकि कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें लगता है मेलापक यानी कि कुंडली आधारित विवाह से बहुत विलंब हो जाता है। जबकि विवाह मेलापक दांपत्य जीवन की समग्रता और अनुकूलता का एक आधार स्तंभ होता है। ऐसे में सामाजिक और शास्त्रीय विषयों में समन्वय कैसे किया जाए, इसका जवाब ढूंढा जाएगा।