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Varanasi News: ईसा मसीह के शिष्य के नाम पर है सेंट थॉमस चर्च
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गिरजाघर चौराहे पर मसीही समुदाय के आस्था का केंद्र ‘सेंट थॉमस चर्च’ अंग्रेजी हुकूमत का गवाह रहा है। इस जगह सेंट थॉमस ने प्रभु यीशु की आराधना की थी। बाद में उन्हीं के नाम पर यहां चर्च की स्थापना की गई।
पादरी एन स्टीवंस बताते हैं कि प्रभु यीशु के 12 शिष्यों में से एक सेंट थॉमस ने 52 से 72 ईसवी तक भारत में मसीही धर्म का प्रचार किया था। अरब सागर पार कर वह सबसे पहले केरल पहुंचे थे। भारत यात्रा के दौरान मद्रास से चलकर काशी पहुंचे। यहां उन्होंने गिरजाघर इलाके में प्रवास किया, उस वक्त यहां जंगल हुआ करता था। प्रवास के दौरान वह क्रूस लगाकर आराधना करते थे। यहीं पर उन्होंने अपना यात्रा का वृत्तांत भी लिखा था। बाद में वह मद्रास लौटे और वहीं रह गए। बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी के एक सिपाही जॉन थोमर ने सेंट थॉमस के यात्रा वृत्तांत को पढ़ा और यहां आकर आराधना वाली जगह की खोज की। फिर चर्च का निर्माण कराया।
अंग्रेजों के जमाने की अनूठी वास्तुकला
एन स्टीवंस की माने तो ईंटों की संरचना के अनुसार यह चर्च 1700 ईसवी के बाद का है। देश के सबसे प्राचीन गिरजाघरों में से एक चर्च ईस्ट इंडिया कंपनी शासनकाल की अनूठी वास्तुकला का दस्तावेज है। यह चर्च चर्चेंज ऑफ नार्थ इंडिया द्वारा संचालित है। चर्च में देशी-विदेशी सैलानी आते हैं, वो प्रभु यीशु की आराधना के साथ ही चर्च का इतिहास जानकार अभिभूत हो उठते हैं।
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पादरी एन स्टीवंस बताते हैं कि प्रभु यीशु के 12 शिष्यों में से एक सेंट थॉमस ने 52 से 72 ईसवी तक भारत में मसीही धर्म का प्रचार किया था। अरब सागर पार कर वह सबसे पहले केरल पहुंचे थे। भारत यात्रा के दौरान मद्रास से चलकर काशी पहुंचे। यहां उन्होंने गिरजाघर इलाके में प्रवास किया, उस वक्त यहां जंगल हुआ करता था। प्रवास के दौरान वह क्रूस लगाकर आराधना करते थे। यहीं पर उन्होंने अपना यात्रा का वृत्तांत भी लिखा था। बाद में वह मद्रास लौटे और वहीं रह गए। बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी के एक सिपाही जॉन थोमर ने सेंट थॉमस के यात्रा वृत्तांत को पढ़ा और यहां आकर आराधना वाली जगह की खोज की। फिर चर्च का निर्माण कराया।
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अंग्रेजों के जमाने की अनूठी वास्तुकला
एन स्टीवंस की माने तो ईंटों की संरचना के अनुसार यह चर्च 1700 ईसवी के बाद का है। देश के सबसे प्राचीन गिरजाघरों में से एक चर्च ईस्ट इंडिया कंपनी शासनकाल की अनूठी वास्तुकला का दस्तावेज है। यह चर्च चर्चेंज ऑफ नार्थ इंडिया द्वारा संचालित है। चर्च में देशी-विदेशी सैलानी आते हैं, वो प्रभु यीशु की आराधना के साथ ही चर्च का इतिहास जानकार अभिभूत हो उठते हैं।
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