अटल जयंती पर विशेष: राजनाथ सिंह के धरने को खत्म कराने कचहरी पहुंचे थे अटल बिहारी
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प्रखर वक्ता के रूप में संसद में सबको मंत्रमुग्ध करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी काशी में बहुत लोकप्रिय थे। उनके आगमन की सूचना भर से युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में गजब के उत्साह का संचार होता था। वर्ष 2005 में गाजीपुर के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के प्रतिरोध में कचहरी पर धरना दे रहे तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री राजनाथ सिंह के विरोध को समाप्त करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी वाराणसी पहुंच गए थे।
वर्ष 2005 में विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री) वाराणसी कचहरी पर धरने पर बैठ गए। करीब 13 दिनों तक चले धरने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी बनारस पहुंचे और कचहरी पर सभाकर उन्होंने धरना समाप्त कराया। उनके आगमन की सूचना के बाद भाजपा के लोग सड़कों पर उतर आए थे और गोलघर तक भीड़ जुट गई थी।
भाजपा नेता और पत्रकार रहे धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि अटल जी यूं तो पूरे देश में लोकप्रिय थे, मगर बनारस से उनका गहरा नाता था। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के वक्त भाजपा प्रत्याशी शंकर प्रसाद जायसवाल के समर्थन में उन्होंने ऐतिहासिक बेनियाबाद मैदान में जनसभा की थी। टाउनहाल में उनकी सभा आज भी बनारस के पुराने लोगों को भूली नहीं है। 1996 में जेपीएस राठौर के अध्यक्ष चुने जाने पर अटल बिहारी वाजपेयी बीएचयू छात्रसंघ का उद्घाटन करने पहुंचे थे। उनके ओजस्वी विचारों को सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे।
अटल ने बनाया भाजपा का गढ़
एमएलसी अशोक धवन बताते हैं कि जनसंघ की बागडोर संभालने के बाद बनारस में जड़ें मजबूत करने के लिए अटल विहारी वाजपेयी खुद गलियों में वोट मांगने निकले थे। वह समय था 1971 का, जब गढ़वासी टोला मोहल्ला में कार्यकर्ता सम्मेलन करने के बाद पक्का महाल की गलियों में वोट मांगने निकले थे। उनके घूमने का इतना असर पड़ा कि पक्का महाल बीजेपी का गढ़ बन गया।