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सपा विधायक के बिगड़े बोल, BHU और AMU में आंदोलन का विरोध करने वाले 'दोगले लोग'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 05 May 2018 12:01 PM IST
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नफीस अहमद
- फोटो : अमर उजाला
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जिन्ना की तस्वीर को लेकर फैले विवाद पर सपा विधायक नफीस अहमद ने मीडिया को विवादित बयान दिया है। गोपालपुर से विधायक और अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष नफीस अहमद ने आंदोलन का विरोध करने वाले लोगों को दोगला करार दिया है।
वो शुक्रवार को एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आजमगढ़ शहर में थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संघी लोग हमें देशभक्ति न सिखाएं । बीएचयू में धरना हिंदू दे रहे थे। उनका विरोध करने वाले भी दोगले लोग थे।
देश में विकास, रोजगार और अन्य मुद्दों पर फेल होने के बाद मोदी और योगी सरकार लोगों का ध्यान बंटानें के लिए इस तरह के प्रकरण को उठा रही है। मुद्दा यह है कि हमें रोजगार चाहिए, महंगाई पर लगाम चाहिए, विकास चाहिए इन सब मुद्दों पर मोदी और योगी सरकार फेल है इसलिए वह लोगों की भावनाओं को भड़का रही है।
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आरएसएस के लोग न तो मुसलमानों के दोस्त हैं और न हिंदुओं के दोस्त हैं। ये देश के भी नहीं हैं। अगर दोस्त होते तो बीएचयू के अंदर जो आंदोलन हुआ आंदोलन करने वाले भी हिंदू थे और उनका विरोध करने वाले यही दोगले लोग थे। आज अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में बच्चे विरोध कर रहे हैं उनका भी विरोध करने वाले यही हैं।
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वो शुक्रवार को एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आजमगढ़ शहर में थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संघी लोग हमें देशभक्ति न सिखाएं । बीएचयू में धरना हिंदू दे रहे थे। उनका विरोध करने वाले भी दोगले लोग थे।
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देश में विकास, रोजगार और अन्य मुद्दों पर फेल होने के बाद मोदी और योगी सरकार लोगों का ध्यान बंटानें के लिए इस तरह के प्रकरण को उठा रही है। मुद्दा यह है कि हमें रोजगार चाहिए, महंगाई पर लगाम चाहिए, विकास चाहिए इन सब मुद्दों पर मोदी और योगी सरकार फेल है इसलिए वह लोगों की भावनाओं को भड़का रही है।
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आरएसएस के लोग न तो मुसलमानों के दोस्त हैं और न हिंदुओं के दोस्त हैं। ये देश के भी नहीं हैं। अगर दोस्त होते तो बीएचयू के अंदर जो आंदोलन हुआ आंदोलन करने वाले भी हिंदू थे और उनका विरोध करने वाले यही दोगले लोग थे। आज अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में बच्चे विरोध कर रहे हैं उनका भी विरोध करने वाले यही हैं।
मुसलमानों को नहीं थी जिन्ना से मुहब्बत
अलीगढ़
- फोटो : SELF
अहमद ने कहा कि जिन्ना की तस्वीर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 1938 से लगी है। 1947 के बाद जो मुसलमान भारत में रुका वह मौलाना आजाद के नेतृत्व में रुका। अगर उसे जिन्ना से मुहब्बत होती तो वह पाकिस्तान चला जाता।
वो संघी लोग जिन्होंने अंग्रेजों के साथ मिलकर देश को ठगने का काम किया वो लोग हमें देशभक्ति न सिखाएं। इतिहास लिखा जाता है उसे आप बदल नहीं सकते। 1938 में जिन्ना यूनिवर्सिटी में आए थे उनसे पहले 1920 में महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी में आए थे।
तब देश आजाद नहीं हुआ था और आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी। उस समय जिन्ना भी महात्मा गांधी के साथ फ्रीडम फाइटर थे। ये तस्वीर उस समय की है। पार्लियामेंट में भी श्यामाप्रसाद मुखर्जी के साथ जिन्ना और डा. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर के साथ अनेक फ्रीडम फाइटरों की तस्वीर लगी है।
अगर इनको इतनी ही नफरत है तो सबसे पहले जिन्ना हाउस को नेस्तनाबूद करें। अगर इनको इतनी ही नफरत है इतिहास से तो राष्ट्रपति भवन से शुरू करें ताजमहल, लालकिला आदि सभी भवनों को नेस्तनाबूद करें।
वो संघी लोग जिन्होंने अंग्रेजों के साथ मिलकर देश को ठगने का काम किया वो लोग हमें देशभक्ति न सिखाएं। इतिहास लिखा जाता है उसे आप बदल नहीं सकते। 1938 में जिन्ना यूनिवर्सिटी में आए थे उनसे पहले 1920 में महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी में आए थे।
तब देश आजाद नहीं हुआ था और आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी। उस समय जिन्ना भी महात्मा गांधी के साथ फ्रीडम फाइटर थे। ये तस्वीर उस समय की है। पार्लियामेंट में भी श्यामाप्रसाद मुखर्जी के साथ जिन्ना और डा. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर के साथ अनेक फ्रीडम फाइटरों की तस्वीर लगी है।
अगर इनको इतनी ही नफरत है तो सबसे पहले जिन्ना हाउस को नेस्तनाबूद करें। अगर इनको इतनी ही नफरत है इतिहास से तो राष्ट्रपति भवन से शुरू करें ताजमहल, लालकिला आदि सभी भवनों को नेस्तनाबूद करें।