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लैंको-अनपरा रिहंद डैम में बंद करें राख का प्रवाह, वरना करें तालाबंदी0
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अनपरा। राज्य सेक्टर की सबसे बड़ी 2630 मेगावाट वाली अनपरा परियोजना और निजी क्षेत्र की 1200 मेगावाट वाली लैंको (अनपरा सी) परियोजना से निकलने वाली राख का रिहंद में हो रहे प्रभाव को रोकने के लिए एनजीटी की ओवरसाइट कमेटी ने बड़ा कदम उठाया है। कमेटी की तरफ से एनजीटी को भेजी गई रिपोर्ट में प्रवाह रोकने की व्यवस्था सुनिश्चित होने तक दोनों परियोजनाओं को बंद रखने और पर्यावरण मानकों के उल्लंघन के लिए भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है। दोनों परियोजनाओं के लिए एक ही ऐशडैम होने और उसको भी पूरा भरा होने को लेकर नाराजगी जताई गई है। परियोजना की तरफ से तीन माह के लिए मांगी गई मोहलत को भी कमेटी ने अनसुना कर दिया है।
गत 15 से 17 दिसंबर तक दिवसीय दौरे पर न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अगुवाई वाली कमेटी ने बेलवादह स्थित ऐशडैम के पूरी तरह भरे होने और एक ही ऐशडैम होने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। इसको लेकर हुई बैठक में लैंको यूनिट हेड संदीप गोस्वामी ने अनपरा के ऐशडैम में अपनी राख छोड़ने के एवज में अनपरा परियोजना प्रबंधन को अच्छी खासी धनराशि दिए जाने की जानकारी दी। इसको गंभीरता लेते हुए कमेटी ने रिहंद जलाशय को दूषित करने के लिए दोनों परियोजनाओं को जिम्मेदार माना। कमेटी की तरफ से एनजीटी को भेजी रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वांचल की लाइफ लाइन कहे जाने वाले रिहंद जलाशय की हालात बेहद खराब है।
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गत 15 से 17 दिसंबर तक दिवसीय दौरे पर न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अगुवाई वाली कमेटी ने बेलवादह स्थित ऐशडैम के पूरी तरह भरे होने और एक ही ऐशडैम होने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। इसको लेकर हुई बैठक में लैंको यूनिट हेड संदीप गोस्वामी ने अनपरा के ऐशडैम में अपनी राख छोड़ने के एवज में अनपरा परियोजना प्रबंधन को अच्छी खासी धनराशि दिए जाने की जानकारी दी। इसको गंभीरता लेते हुए कमेटी ने रिहंद जलाशय को दूषित करने के लिए दोनों परियोजनाओं को जिम्मेदार माना। कमेटी की तरफ से एनजीटी को भेजी रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वांचल की लाइफ लाइन कहे जाने वाले रिहंद जलाशय की हालात बेहद खराब है।
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