जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले में बुधवार को आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया। इस दौरान आतंकियों ने एक नागरिक को गोली मार दी। इस दौरान उसके साथ उसका तीन साल का नाती(बेटी का बेटा) भी था। आतंकी मस्जिद की ऊपरी मंजिल से लगातार गोलियां बरसा रहे थे और मासूम अपने नाना के शव के पास बैठा था। इसी दौरान उस बच्चे पर एक जवान की नजर पड़ी। बच्चे की जान बचाने वाले सीआरपीएफ के जवान पवन कुमार चौबे वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के गोलढमकवां गांव के रहने वाले हैं।
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जवान का परिवार।
- फोटो : अमर उजाला।
बेटे की बहादुरी से गौरवान्वित पिता सुभाष चंद्र चौबे ने कहा कि पवन ने परिवार, खानदान और गांव का नाम देश भर में रोशन किया है। उनका कहना है कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करें। बेटे ने साबित कर दिया कि वह मां भारती का वीर सपूत है। उन्होंने बताया कि पवन 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। देश के अलग-अलग हिस्सों में पवन ने अब तक सेवाएं दी हैं और मौजूदा समय में वह कश्मीर में तैनात हैं।
उधर, पवन की पत्नी शुभांगी चौबे ने कहा कि हमारे भी दो बच्चे हैं। पति की वीरता पर गर्व हो रहा है। उन्होंने पूरे परिवार, समाज और गांव का मान बढ़ाया है। शुभांगी ने कहा कि पति से फोन पर बात हुई, उन्होंने पूरी घटना के बारे में विस्तार से बताया। हम उनकी सलामती की रोजाना दुआ करते हैं।
जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर के 65 वर्षीय बशीर खान बुधवार सुबह घर से दूध लेने निकले थे। उनके साथ तीन साल का नाती भी था। सुबह करीब पौने आठ बजे जैसे ही वे सोपोर के मॉडल टाउन इलाके की बिस्मिल्लाह कॉलोनी के पास पहुंचे आतंकी हमले का शिकार हो गए, लेकिन मासूम किसी तरह से बच गया। मासूम अपने नाना के शव पर बैठा था। इसी दौरान जवानों की नजर उस बच्चे पर पड़ी।
सोपोर के एसएचओ आजीम खान ने बताया, एक नागरिक के साथ सीआरपीएफ के कुछ जवान खून में लथपथ जमीन पर गिरे थे। करीब तीन साल का एक बच्चा भी वहीं था। आतंकी मस्जिद की ऊपरी मंजिल से लगातार फायरिंग कर रहे थे। सबसे पहले ये कोशिश थी कि फायरिंग व्यू को ब्लॉक कर किसी तरह से बच्चे को उठाया जाए। वहां मौजूद बुलेटप्र्रूफ गाड़ियां का घेरा बनाकर बच्चे को किसी तरीके से निकाला।