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कहीं शौचालय पर लटक रहा ताला तो कहीं गिरीं दीवारें

Sun, 26 Sep 2021 01:29 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 01:29 AM IST
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Somewhere the lock hanging on the toilet and somewhere the walls fell
प्रशासन ने जिले को ओडीएफ घोषित कर रखा है। लेकिन इसकी पड़ताल की गई तो जमीनी हकीकत काफी अलग मिली। आलम यह है कि ग्रामीण इलाकों में सरकार द्वारा योजना के तह बनवाए गए शौचायलों में कहीं ताला लटका मिला तो कहीं दरवाजा गायब मिला। ज्यादातर जगहों पर शौचायल की दीवारें टूटी मिलीं। जिसके चलते लोग इन शौचालयों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। यह हकीकत शनिवार को ब्लाकवार की गई पड़ताल में सामने आई।
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बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्तूबर 2014 में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत शहरों में साफ-सफाई पर ध्यान देने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार की ओर से शौचालय भी बनवाए गए। ब्लॉकवार शौचालय बनवाए जाने के लिए सरकार की ओर से गावों में बजट भी दिया जाता है। जिले में 699 ग्राम पंचायतों में 665 गांवों में शौचालय निर्माण का दावा किया जा रहा है लेकिन जो शौचालय बने हैं, उनकी हालत बहुत खराब है।
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शौचालय की छत पर जमी घास, टूट गए दरवाजे
सारनाथ। क्षेत्र में बने शौचालयों का हाल खस्ताहाल है। यहां अधिकांश शौचालय जर्जर पड़े हुए हैं। इसका उपयोग गांव के लोग नहीं कर रहे हैं। शौचालयों के छत पर जहां बड़ी-बड़ी घास और झाड़ियां भी हैं। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की ओर से मानक के अनुरूप शौचालय का निर्माण गया कराया होता तो शायद यह दशा नहीं होती।
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गांवों में कई शौचालय बने ही नहीं, कई पर छत ही नहीं
राजातालाब । आराजी लाइन विकास खंड क्षेत्र के तमाम गांवों में शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायत हुई थी। शिकायत पर मेहंदीगंज में जांच रिपोर्ट में कई शौचालयों के निर्मित न होने का मामला सामने आया था। गांव में बहुत से शौचालयों का निर्माण अब भी अपूर्ण हैं, इसकी शिकायत लोगों को जिला प्रशासन से की है। गांव के ऋषि नारायण, रामाश्रय पटेल का कहना है कि मेहंदीगंज में 1314 शौचालय बनाने के लिए सर्वे हुआ था, इसमें 1198 शौचालय पूर्ण निर्मित किए जाने का दावा किया गया था। उसमें 264 शौचालय आज तक नहीं बने। गांव के 50 लोगों ने हलफनामा देकर अपने शौचालय अर्ध निर्मित होने तथा बिना शौचालय बने ही उनके नाम का पैसा निकाल लिए जाने का मामला उठाया है। ग्रामीणों की शिकायत है कि गांव में आज भी कई ऐसे शौचालय हैं जिनके ऊपर छत तक नहीं है।
शौचालय में लटकता है ताला
सेवापुरी। सेवापुरी के भरहरिया गांव में बने सामुदायिक शैचालय पर ताला लटकता रहता है। इस वजह से लोगों को बड़ी परेशानी होती है। यहां तैनात कर्मचारी को मानदेय भी पूरा मिलता है। इसके अलावा गांवों में कई ऐसे शौचालय हैं, इनमें ताले रहते हैं और कुछ का निर्माण भी अधूरा है।

दानगंज : अधूरे पड़े हैं शौचालय, ताले भी लटके
दानगंज चोलापुर के 89 ग्राम पंचायतों में बनने वाले सामुदायिक शौचालय कहीं अधूरे पड़े हैं तो कहीं बनकर ताले लटक रहे हैं। बंद तालों को खोलने के लिए केयरटेकर गांव में नियुक्त कर दिए गए हैं जो सुबह शाम दीपक जलाकर बंद करते हैं और खोलते हैं। हालत यह है कि लोग इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ग्राम पंचायत रसड़ा रामपुर भिदुर गांव के शौचालय को पूर्ण नहीं किया गया है। काम अधूरा है और ताला बंद रहा। रसड़ा में शौचालय के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। यहां देखरेख करने वालों को नियमित भुगतान भी हो रहा है।
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