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अनोखी परंपरा : काशी में देवी दुर्गा की विदाई से पहले सिंदूर खेला, रीति-रिवाज से संपन्न हुआ आयोजन; देखें PHOTO

Sun, 13 Oct 2024 12:59 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 13 Oct 2024 12:59 PM IST
सार

Varanasi News: देवी मां की विदाई से पहले पारंपरिक तरीके से महिलाओं ने एक-दूसरे को त्योहार की बधाई दी। वहीं, आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन की टीम सुरक्षा को लेकर भी अलर्ट रही। पारंपरिक कार्यक्रम में यातायात की भी दिक्कत न हो इसका भी पूरा ख्याल रखा गया था। 

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Sindoor played before departure of Devi Maa event was completed with rituals
एक-दूसरे को सिंदूर लगातीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के चेतसिंह घाट पर रविवार की सुबह धुनुची सहित सिंदूर खेला का भव्य आयोजन हुआ। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर त्योहार की बधाई दी। वहीं, भेलूपुर स्थित जिम स्पोर्टिग क्लब में बंग समाज की महिलाओं ने भी सिंदूर खेला किया। मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करके विदाई दी गई।
Sindoor played before departure of Devi Maa event was completed with rituals
पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ सिंदूर खेला। - फोटो : अमर उजाला

आश्चे बोछोर आबर होबे... अर्थात ससुराल को विदाई देते हुए दोबारा जल्दी आने का उद्घोष बंगाली समुदाय के पंडालों में गूंज उठा। रविवार को भेलूपुर से लेकर दशाश्वमेध तक बंगाली समुदाय ने मां जगदंबा को भीगी पलकों के साथ विदाई दी। बैंड बाजे की धुन पर थिरकती हुए महिलाओं ने सिंदूर खेला की रस्म भी निभाई और जब विदाई का मौका आया तो आंखें भी छलक उठीं।

Sindoor played before departure of Devi Maa event was completed with rituals
पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ सिंदूर खेला। - फोटो : अमर उजाला
देश की धार्मिक राजधानी काशी नगरी में यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। बंग समाज की सुहागिन महिलाओं ने पान के पत्ते से सिंदूर चढ़ाया और मिठाई खिलाई।
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Sindoor played before departure of Devi Maa event was completed with rituals
पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ सिंदूर खेला। - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद सभी सुहागिनों ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। पूरा पंडाल सिंदूर की रंगत से रंग गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की नृत्य पर धुनुची नृत्य का आयोजन हुआ। इसमें भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 

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Sindoor played before departure of Devi Maa event was completed with rituals
पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ सिंदूर खेला। - फोटो : अमर उजाला

सनातन परंपरा की विशेषता है कि कोई भी शुभ कार्य समाप्त नहीं होता। इसे पुनः होने की उम्मीद होती है। दुर्गा पूजा, छठ, गणपति उत्सव एक बार संपन्न होते ही अगले वर्ष के लिए मन तैयार हो जाता है।

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