यूपी: निजी मकान में मिलीं 66 बाढ़ राहत किट, वीडियो से शुरू हुआ मामला; ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
बलिया में बाढ़ राहत सामग्री के वितरण को लेकर मामला सामने आया है। निजी मकान में 66 राहत किट रखे होने का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि राहत सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय निजी परिसर में रखी गई। वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी।
विस्तार
मनियर थाना क्षेत्र के बड़ागांव में बृहस्पतिवार को एक निजी मकान के कटरे में बाढ़ राहत सामग्री के पैकेट रखे मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया। दो पिकअप वाहनों से राहत सामग्री उतारकर यहां रखे जाने की जानकारी पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम पहुंची और मामले की जांच शुरू की। मौके से 66 बाढ़ राहत किट मिलने की पुष्टि अधिकारियों ने की है।
ग्रामीणों का आरोप था कि दो पिकअप से बाढ़ राहत सामग्री लाकर बड़ागांव स्थित निजी मकान में रखी गई है, जबकि बड़ागांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र नहीं है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि राहत सामग्री यहां किस उद्देश्य से लाई गई। उनका आरोप था कि यह सामग्री दुबहड़ थाना क्षेत्र के चैन छपरा में वितरण के लिए भेजी जानी थी और उसे ठिकाने लगाने के उद्देश्य से यहां रखा गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूचना पर तहसीलदार सदर अभिषेक कुमार, एसडीएम बांसडीह पीयूष कुमार मिश्रा, तहसीलदार बांसडीह नितिन सिंह, सीओ बांसडीह जयशंकर मिश्रा, मनियर थाना प्रभारी अजय कुमार त्रिपाठी पहुंचे। ग्राम प्रधान संजय राजभर, छात्र नेता रोहित सिंह माही, दीपू सिंह, बैजू राम, छीतेश्वर राम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि विश्वकर्मा जयंती के कारण वाहनों को खाली कराने के लिए राहत सामग्री को अस्थायी रूप से यहां रखा गया था।
बाद में एसडीएम बलिया सदर गोपनेश तिवारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मौजूदगी में रेपूरा के लेखपाल शिव वर्मा से मामले के संबंध में पूछताछ की। अधिकारियों ने बताया कि लेखपाल के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर उसके विरुद्ध निलंबन और प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने मौके पर रखी राहत सामग्री को पिकअप पर लदवाकर बाढ़ राहत कार्य में वितरण के लिए भेज दिया। ग्रामीणों ने सामग्री को मौके से हटाने का विरोध करते हुए विधायक केतकी सिंह के पहुंचने तक इसे नहीं ले जाने देने की मांग की। इस दौरान नारेबाजी भी हुई।
प्रशासन की ओर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद मामला शांत हुआ और राहत सामग्री पिकअप पर लादकर वहां से ले जाई गई। ग्रामीणों के अनुसार राहत सामग्री दो कमरों में रखी गई थी। एक अन्य कमरे को खोलने का भी प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं खुल सका।
चर्चा यह भी रही कि बांसवरिया का एक व्यक्ति एग्रीटेक में निजी सर्वेयर है और उसी के माध्यम से बाढ़ राहत किट एक निजी मकान में रखवाई गई थी। इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसडीएम बलिया सदर गोपनेश तिवारी ने बताया कि मौके से 66 राहत किट मिली हैं। इन्हें बाढ़ पीड़ितों के बीच वितरित किया जाएगा। मामले की जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी व्यक्ति संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो से शुरू हुआ मामला, ग्रामीणों ने रोका सामान
बताया जा रहा है कि पिकअप से राहत सामग्री उतारे जाने का किसी व्यक्ति ने वीडियो बना लिया था। यह वीडियो बांसडीह विधायक केतकी सिंह को भेजे जाने की चर्चा है। इसके बाद विधायक की ओर से तहसीलदार सहित बड़ागांव के ग्राम प्रधान संजय राजभर को सूचना दी गई। तहसीलदार ने संबंधित लेखपाल को मौके पर भेजा। लेखपाल और प्रधान ने ग्रामीणों के साथ मिलकर अधिकारियों के पहुंचने तक सामग्री को बाहर ले जाने से रोक रखा। इसके बाद अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और जांच की।