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डीपीआर के बाद से सिर्फ इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 21 Apr 2016 02:15 AM IST
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मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार मेट्रो रेल कॉरीडोर परियोजना की रफ्तार काशी में धीमी पड़ गई है। फरवरी में शासन स्तर से 12256 करोड़ के प्रोजेक्ट की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर मुहर लगने के बाद योजना एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई है। तब से मामला ठंडा पड़ गया है। लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन की देखरेख में काम होना है। निर्माण की देखरेख की जिम्मेदारी वीडीए को दी गई है। वीडीए के अधिकारी भी काम शुरू करने के मसले पर शासन के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं।
मेट्रो का काम यहां दो चरणों में होगा। 29.3 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर पर 12256 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पहले चरण में बीएचयू से भेल (शिवपुर) तक मेट्रो रूट का निर्माण कराया जाना है। इस पर 8418 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं शिवपुर के गणेशपुर में वर्कशॉप और बेनियाबाग में टर्मिनल बनाया जाएगा। दूसरे चरण में बेनियाबाग से सारनाथ स्टेशन तक मेट्रो चलेगी। सारनाथ तक 9.88 किमी लंबे इस रूट पर 3838 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गौरतलब है कि जनवरी के अंत में मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें मेट्रो परियोजना की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजा गया था।
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मेट्रो का काम यहां दो चरणों में होगा। 29.3 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर पर 12256 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पहले चरण में बीएचयू से भेल (शिवपुर) तक मेट्रो रूट का निर्माण कराया जाना है। इस पर 8418 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं शिवपुर के गणेशपुर में वर्कशॉप और बेनियाबाग में टर्मिनल बनाया जाएगा। दूसरे चरण में बेनियाबाग से सारनाथ स्टेशन तक मेट्रो चलेगी। सारनाथ तक 9.88 किमी लंबे इस रूट पर 3838 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गौरतलब है कि जनवरी के अंत में मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें मेट्रो परियोजना की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजा गया था।
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