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स्वर्ण शताब्दी समारोह का आयोजन कल
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वाराणसी। महर्षि दयानंद सरस्वती के काशी के विद्वानों से शास्त्रार्थ के 150 साल पूरे होने पर तीन दिवसीय स्वर्ण शताब्दी समारोह का शुभारंभ शुक्रवार से होगा। 11 से 13 अक्तूबर तक नरिया स्थित रामनाथ चौधरी शोध संस्थान वाटिका में आयोजित वैदिक धर्म महासम्मेलन में उद्योगपति एवं पद्मभूषण महाशय धर्मपाल मुख्य अतिथि होंगे।
सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा और आर्य प्रतिनिधि सभा के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर से विद्वान जुटेंगे। इस अवसर पर प्राणायाम, ध्यान योग, यज्ञ, प्रवचन, भजन, व्याख्यान और आर्यवीर दल का प्रदर्शन किया जाएगा। 13 अक्तूबर को कार्यक्रम स्थल नरिया से विशाल शोभायात्रा निकलेगी। महर्षि दयानंद काशी शास्त्रार्थ स्थल आनंदबाग में यज्ञ, भजन और व्याख्यान के उपरांत समापन होगा।
आर्य प्रतिनिधि सभा के दिनेश आर्य ने बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने 16 नवंबर 1869 में दुर्गाकुंड स्थित आनंद बाग में परमात्मा के स्वरूप पर काशी के विद्वानों से शास्त्रार्थ किया था। उन्होेंने वेद से मूर्ति पूजा का प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए चुनौती दी थी। उन्होंने बताया कि 1869 में सभा की अध्यक्षता तत्कालीन काशी नरेश ईश्वरी नारायण सिंह ने की थी।
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सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा और आर्य प्रतिनिधि सभा के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर से विद्वान जुटेंगे। इस अवसर पर प्राणायाम, ध्यान योग, यज्ञ, प्रवचन, भजन, व्याख्यान और आर्यवीर दल का प्रदर्शन किया जाएगा। 13 अक्तूबर को कार्यक्रम स्थल नरिया से विशाल शोभायात्रा निकलेगी। महर्षि दयानंद काशी शास्त्रार्थ स्थल आनंदबाग में यज्ञ, भजन और व्याख्यान के उपरांत समापन होगा।
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आर्य प्रतिनिधि सभा के दिनेश आर्य ने बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने 16 नवंबर 1869 में दुर्गाकुंड स्थित आनंद बाग में परमात्मा के स्वरूप पर काशी के विद्वानों से शास्त्रार्थ किया था। उन्होेंने वेद से मूर्ति पूजा का प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए चुनौती दी थी। उन्होंने बताया कि 1869 में सभा की अध्यक्षता तत्कालीन काशी नरेश ईश्वरी नारायण सिंह ने की थी।
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