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शाहिद परवेज के सितार ने छेड़े मन के तार
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Fri, 25 Dec 2015 02:38 AM IST
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महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में त्रिदिवसीय संगीत समारोह का आगाज गुरुवार को उस्ताद शाहिद परवेज के सितार वादन से हुआ। स्वतंत्रता भवन में आयोजित इस संगीत समारोह में शाहिद परवेज ने सितार के तारों की धुन से वहां बैठे श्रोताओं के मन के तार छेड़ दिए।
स्वतंत्रता भवन में चार बजे संगीत समारोह के उद्घाटन सत्र पहले दिन उस्ताद शाहिद परवेज की प्रस्तुति रही। उन्होंने अपने सितारवादन की शुरुआत राग पुरिया धनाश्री से की। इसमें अलाप, जोड़ झाला, झप ताल में बंदिश और तीन ताल में बंदिश के बाद झाल बजाया। मध्य लय एक ताल, द्रुत तीन ताल में रागों की सितार से अवतारणा की। अंत में उन्होंने सितार पर गायकी अंग का ठुमरी बजाकर लोगों को भावविभोर किया।
उनके साथ तबले पर पंडित पुंडलीक कृष्ण भागवत ने और डॉ. श्रावणी विश्वास ने तानपुरे पर संगत किया। उस्ताद शाहिद परवेज की प्रस्तुति से पहले संगीत एवं मंच कला संकाय के सदस्यों ने भजनों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। के शशि कुमार, डॉ. रेवती साकलकर, डॉ. संगीता पंडित, डॉ. ज्ञानेश, डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य, डॉ. अमरीश कुमार ने भजन की प्रस्तुति दी। ...प्रभु जी तुम चंदन हम पानी, मालवीय जी के प्रिय भजन ...सब देवन के देव तुम्हीं, सब जब के आधार, ...काहे रे बन खोजन जाए जैसे भजनों की प्रस्तुति दी।
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इनके साथ तबले पर डॉ. रजनीश, हारमोनियम पर रमेश पोखरियाल और सितार पर हार्दिक वर्मा ने संगत किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने महामना मालवीय जी पर डॉ. विश्वनाथ पांडेय द्वारा लिखी दो पुस्तक के साथ ही मालवीय जी की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तुत भारतीय शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों की एक-एक घंटे की सात डीवीडी का लोकार्पण किया।
कलाकारों का स्वागत प्रो. शारदा वेलंकर, प्रो. बीएन मिश्रा और डॉ. राजेश शाह ने किया। संचालन डॉ. लयलीना भट्ट ने व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विश्वनाथ पांडेय ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. केपी उपाध्याय, शताब्दी वर्ष समारोह प्रकोष्ठ के चेयरमैन प्रो. पीसी शुक्ला, प्रो. धनंजय पांडेय, अभय ठाकुर आदि मौजूद रहे।
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स्वतंत्रता भवन में चार बजे संगीत समारोह के उद्घाटन सत्र पहले दिन उस्ताद शाहिद परवेज की प्रस्तुति रही। उन्होंने अपने सितारवादन की शुरुआत राग पुरिया धनाश्री से की। इसमें अलाप, जोड़ झाला, झप ताल में बंदिश और तीन ताल में बंदिश के बाद झाल बजाया। मध्य लय एक ताल, द्रुत तीन ताल में रागों की सितार से अवतारणा की। अंत में उन्होंने सितार पर गायकी अंग का ठुमरी बजाकर लोगों को भावविभोर किया।
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उनके साथ तबले पर पंडित पुंडलीक कृष्ण भागवत ने और डॉ. श्रावणी विश्वास ने तानपुरे पर संगत किया। उस्ताद शाहिद परवेज की प्रस्तुति से पहले संगीत एवं मंच कला संकाय के सदस्यों ने भजनों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। के शशि कुमार, डॉ. रेवती साकलकर, डॉ. संगीता पंडित, डॉ. ज्ञानेश, डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य, डॉ. अमरीश कुमार ने भजन की प्रस्तुति दी। ...प्रभु जी तुम चंदन हम पानी, मालवीय जी के प्रिय भजन ...सब देवन के देव तुम्हीं, सब जब के आधार, ...काहे रे बन खोजन जाए जैसे भजनों की प्रस्तुति दी।
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इनके साथ तबले पर डॉ. रजनीश, हारमोनियम पर रमेश पोखरियाल और सितार पर हार्दिक वर्मा ने संगत किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने महामना मालवीय जी पर डॉ. विश्वनाथ पांडेय द्वारा लिखी दो पुस्तक के साथ ही मालवीय जी की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तुत भारतीय शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों की एक-एक घंटे की सात डीवीडी का लोकार्पण किया।
कलाकारों का स्वागत प्रो. शारदा वेलंकर, प्रो. बीएन मिश्रा और डॉ. राजेश शाह ने किया। संचालन डॉ. लयलीना भट्ट ने व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विश्वनाथ पांडेय ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. केपी उपाध्याय, शताब्दी वर्ष समारोह प्रकोष्ठ के चेयरमैन प्रो. पीसी शुक्ला, प्रो. धनंजय पांडेय, अभय ठाकुर आदि मौजूद रहे।