Sawan Special: काशी का वह शिव धाम जहां यमराज को भी माननी पड़ी थी हार, सावन में एक लोटा जल चढ़ाने की विशेष महिमा
वाराणसी से करीब 30 किमी दूर गंगा-गोमती के संगम तट पर स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों में से एक है। विभिन्न प्रकार की परेशानियों से ग्रसित लोग अपनी दुःखों को दूर करने के लिए यहाँ आते हैं।
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वाराणसी से करीब 30 किमी दूर गंगा-गोमती के संगम तट पर स्थित कैथी मार्कंडेय महादेव धाम में भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि बाबा के इस धाम से यमराज को भी पराजित होकर लौटना पड़ा था। सावन में बाबा के दर्शन पूजन और जलाभिषेक के लिए कांवरियों के साथ ही शिवभक्तों का रेला पूर्वांचल के जिलों से भी उमड़ता है।
वाराणसी गाजीपुर हाईवे के किनारे गंगा गोमती के संगम किनारे कैथी गांव स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर साल भर भक्तों से गुलजार रहता है। सावन मास में एक लोटा गंगा जल व रामनाम लिखा बेलपत्र चढ़ाने मात्र से ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
काशी खंड के अनुसार ऋषि मार्कंडेय के अल्पायु होने पर उनके माता-पिता ने संगम तट पर शिव विग्रह बनाकर पूजन अर्चन करना शुरू कर दिया। आयु पूरी होने पर प्राण हरण के लिए यमराज पहुंचे तभी भगवान शिव साक्षात प्रकट हो गए और यमराज को लौटना पड़ा।
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तभी से यहां मार्कंडेय महादेव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक होने लगा। सावन मास भर यहां लोग शिवपुराण, महामृत्युंजय मंत्र का जप, सत्यनारायण भगवान की कथा व अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।