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केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने की शिक्षा नीति में बदलाव की वकालत

Sun, 29 Oct 2017 05:47 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sun, 29 Oct 2017 05:47 PM IST
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Satyapal Singh said to give melioration education to children
केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत है। हम जो शिक्षा बच्चों को दें वो न सिर्फ रोजगार परक हो बल्कि संस्कार परक भी हो।
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महात्मा गांधी के विचारों पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ऐसी हो जो मस्तिष्क को ज्ञान, हृदय को भाव-करुणा और हाथ को काम दे। हमारी शिक्षा विकासोन्मुख होने के साथ संस्कृति की धरातल पर जमी होनी चाहिए। हमारी कोशिश है कि नई शिक्षा नीति में इन सभी का समन्वय हो।
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बीएचयू ट्रामा सेंटर में आयोजित इंडियन कॉलेज ऑफ एनेस्थिशियोलॉजिस्ट के दीक्षांत समारोह में आए डॉ. सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश के बीस विश्वविद्यालयों को विश्व स्तरीय शैक्षणिक संस्थान बनाने की कवायद की जा रही है। सप्ताह भर पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की है।
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इन बीस विश्वविद्यालयों में दस विश्वविद्यालय सरकारी होंगे और दस प्राइवेट। इन्हें विश्व स्तरीय शैक्षणिक संस्थान बनाने के लिए ‘ज्ञान’ यानी कि ग्लोबल इनिशिएटिव एकेडमिक नेटवर्किंग’ प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत इन विश्वविद्यालयों में दो सौ विदेशी प्रोफेसरों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार फंड उपलब्ध कराएगी।

प्राचीन निश्चेतना पद्धति पर करना होगा शोध

Satyapal Singh said to give melioration education to children
एनोस्थिसिया पर आयोजित काफ्रेंस में बोलते केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह। - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें प्राचीन निश्चेतना चिकित्सा पद्धति पर शोध करना चाहिए। महाभारत युग में चिकित्सा पद्धति कैसी थी, उस वक्त निश्चेतना के लिए वैद्य कौन सी पद्धति का इस्तेमाल करते थे, उस पर शोध होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नागार्जुन सबसे प्राचीन चिकित्सक माने जाते हैं। एक चिकित्सक को सबसे पहले मरीज को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि वह उनके पास सुरक्षित हाथों में है।

दीक्षांत समारोह में चार विशिष्ट चिकित्सक डॉ. कल्याणी दास, डॉ. जीवी प्रेम कुमार, डॉ. राकेश गर्ग और डॉ. राव को फेलोशिप प्रदान की गई। वार्षिक रिपोर्ट सीईओ डॉ. बलजीत सिंह ने प्रस्तुत की। अध्यक्ष प्रो. बी राधाकृष्णन ने स्वागत किया।

अध्यक्षता कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी ने की। आईएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ला, प्रो. एलडी मिश्रा, प्रो. पी. रंजन, डॉ. वीपी कुमरा, प्रो. एसके माथुर, प्रो. एसके गुप्ता आदि मौजूद रहे। 
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