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संस्कृत विश्वविद्यालय में छात्रसंघ पर एनएसयूआई का कब्जा

Tue, 15 Dec 2015 02:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 15 Dec 2015 02:14 AM IST
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Sanskrit University in possession of NSUI on becomes
टैग- संस्कृत विवि
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छात्रसंघ पर एनएसयूआई का कब्जा
क्रासर-
अध्यक्ष पद पर 36 मतों के अंतर से जितेंद्र धर द्विवेदी हुए विजयी
उपाध्यक्ष, महामंत्री, पुस्तकालय मंत्री पद पर अभाविप को मिली जीत
गहमागहमी के बीच 1361 छात्र-छात्राओं ने किया मतदान
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई समर्थित उम्मीदवार जितेंद्र धर द्विवेदी ने 36 मतों से जीत दर्ज करते हुए अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया। बाकी सभी सीटें विद्यार्थी परिषद के प्रत्याशियों के खाते में गईं। सोमवार को मतदान के बाद शाम छह बजे परिणाम घोषित किए गए। इसके बाद कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई।
गहमागहमी के बीच परीक्षा भवन में बने चार बूथों पर सुबह नौ बजे से दो बजे तक मतदान हुआ, जिसमें 1886 में से 1361 विद्यार्थियों ने वोट डाले। चुनाव अधिकारी प्रो. हेतराम कछवाह के निर्देशन में अपराह्न तीन बजे से मतगणना शुरू हुई और शाम छह बजे परिणाम घोषित किए गए। चुनाव अधिकारी के अनुसार अध्यक्ष पद पर जितेंद्र धर द्विवेदी 620 मत पाकर विजयी हुए जबकि दूसरे नंबर पर रहे विवेक कुमार चौबे को 584 मत मिले। उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित शिवशंकर यादव को 511 मिले जबकि 362 वोट पाकर शुभम शर्मा दूसरे स्थान पर रहे। महामंत्री पद पर 727 मत पाकर जीतेंद्र कुमार विजयी हुए जबकि दूसरे नंबर पर रहे राजेश चौबे ने 517 मत मिले। इसी तरह 778 मत सूर्य प्रकाश उपाध्याय पुस्तकालय मंत्री पद पर निर्वाचित घोषित किए गए। उधर, मतगणना पूरी होने के बाद विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने सवाल खड़ा करते हुए दोबारा मतों की गिनती कराने मांग की। इस पर पुन: मतगणना कराई गई, जिसमें कोई अंतर नहीं मिला।  
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आठ फर्जी वोटर पकड़े गए
छात्रसंघ चुनाव में मतदान के दौरान चीफ प्रॉक्टर डॉ. शशि रानी मिश्रा ने आठ फर्जी वोटरों को पकड़ा। इनमें तीन छात्राएं भी शामिल थीं। दोपहर में करीब एक बजे एक साथ पांच छात्र और तीन छात्राएं मुख्य द्वार से तो किसी तरह परिसर में प्रवेश पा लिया लेकिन शिक्षा संकाय के पास बने बैरियर पर चीफ प्राक्टर ने मतदाता पहचान पत्र मांगा तो उनसे दे नहीं पाए। सभी के नाम, पता पूछने पर पता चला कि इनमें से कोई भी विश्वविद्यालय का विद्यार्थी नहीं है। चीफ प्रॉक्र ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। कुछ देर बाद मौके पर पहुंची पुलिस उन्हें हिरासत में ले गई।
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