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Varanasi: संगीत साधकों के लिए तीर्थ से कम नहीं संकटमोचन का दरबार, बिना शुल्क प्रस्तुति देते हैं कलाकार

Mon, 17 Apr 2023 05:12 PM IST
उत्पल कांत आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 17 Apr 2023 05:12 PM IST
सार

विश्वप्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह में ना कोई हिंदू, ना मुस्लिम, ना सिख ना इसाई। सूर्यास्त से सूर्योदय तक आयोजन में गाने, बजाने और नृत्य करने वाले कलाकार और मंच के सामने श्रोता बनकर बैठने वाले भी कलाकार। 

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Sankat mochan temple is pilgrimage for music seekers
संकटमोचन संगीत समारोह की अंतिम निशा में सोनू निगम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संकटमोचन की ड्योढ़ी पर संगीत का अनूठा तीर्थ है। यह दरबार ऐसा है, जहां पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण की धाराओं का मिलन होता है। देश की सरहदें यहां आकर बस प्यार का पैगाम ही देती हैं। विश्वप्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह में ना कोई हिंदू, ना मुस्लिम, ना सिख ना इसाई। सूर्यास्त से सूर्योदय तक आयोजन में गाने, बजाने और नृत्य करने वाले कलाकार और मंच के सामने श्रोता बनकर बैठने वाले भी कलाकार। मूर्धन्य कलाकार इस दरबार में संगीत के फूलों से हनुमत लला का आंगन सजाने आए हैं।

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संकटमोचन संगीत समारोह में हाजिरी लगाने वाले कलाकार कोई शुल्क या मानदेय नहीं लेते हैं। अपनी कला को प्रभु के चरणों में अर्पित करते हैं। दर्शकों की वाहवाही ही उनका मेहनताना होता है। इस तरह का बिना शुल्क का आयोजन देश के किसी हिस्से में शायद ही होता हो। देश के जाने-माने कलाकार यहां आने के लिए लालायित रहते हैं । मान्यता है कि हनुमत दरबार में प्रस्तुति करने वाला कलाकार स्वत: ही राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त कर लेता है।
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संगीत की पाठशाला से कम नहीं है समारोह

Sankat mochan temple is pilgrimage for music seekers
संकटमोचन संगीत समारोह: जावेद अली के 'कुंफाया-कुंफाया' गाने पर झूमे लोग - फोटो : अमर उजाला

काशी की परंपराओं को देखना, संगीत को समझना, साधना की शक्ति और भक्ति को साक्षात देखना हो तो संकटमोचन संगीत समारोह में चले आइए। मंदिर के महंत परिवार ने पांच सौ वर्षों की संगीत साधना को पिछले सौ वर्षों से महोत्सव का स्वरूप दे दिया है। सौ वर्ष पहले शुरू संगीत का समारोह अब शताब्दी वर्ष में नए पड़ाव पर है। शहर और आसपास के नवोदित कलाकारोंं को वर्ष भर इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार रहता है।

पहला मौका होता है, जब उनको अपने गुरुओं और देश के शीर्षस्थ कलाकारों से रूबरू होने का अवसर मिलता है। पं. साजन मिश्र कहते हैं कि संकटमोचन संगीत समारोह हमारे लिए पाठशाला है। शाम से शुरू होकर अनवरत 12 घंटे तक चलने वाले इस आयोजन की हर बात निराली है। देश भर के पद्म अवार्डी, शास्त्रीय संगीत के मूर्धन्य कलाकार हाजिरी लगाने के लिए आतुर रहते हैं।

समय के साथ आज भी कायम हैं परंपराएं

Sankat mochan temple is pilgrimage for music seekers
संकटमोचन संगीत समारोह में बांसुरी बजाते पं. हरि प्रसाद चौरसिया।
हनुमत दरबार में समय के साथ आज भी परंपराएं कायम हैं। चबूतरेनुमा मंच पर आलथी-पालथी मारकर दर्शकों के सामने प्रस्तुति। मंदिर के आंगन और दालान में बैठा दर्शकों का हुजूम, पारखी नजरें, कला व कलाकार की हर थाप को पहचाने वाले कलाकार दर्शक कहीं और नहीं मिलते। यही कारण था कि दूसरी निशा में मंच पर पधारे गजल गायक तलत अजीज ने भी कह दिया कि मैं तो सदियों के बाद ऐसी महफिल देख रहा हूं, जहां आने की तमन्ना हर कलाकार को होती है।

नजर आते हैं हर वय के लोग

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संकटमोचन संगीत समारोह की अंतिम निशा - फोटो : अमर उजाला

अगर कोई कहता है कि शास्त्रीय संगीत युवाओं की पसंद नहीं है तो उसकी सारी बातें संकटमोचन के दरबार में आकर गलत साबित होंगी। यहां सुनने और सुनाने वाले दोनों युवा हैं। वरिष्ठ कलाकार भी बाबा दरबार में आकर खुद को युवा ही महसूस करते हैं। यल्ला वेंकटेश्वर राव ने यू राजेश के मेंडोलिन के साथ मृदंगम की जो संगत की तो हर कोई देखता ही रह गया। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने भी कह दिया भले ही यह उम्र में अधिक लग रहे हैं, लेकिन आज भी यह युवा ही हैं।

फरमाइशें पूरी करते हैं दिग्गज कलाकार

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संकटमोचन संगीत समारोह में मालिनी अवस्थी - फोटो : अमर उजाला

देश का यह इकलौता आयोजन है, जहां रात भर शास्त्रीय संगीत की सुरलहरियां बहती हैं। श्रोता फरमाइशें करते हैं, जिसे बड़े कलाकार भी पूरा करते हैं। हनुमत दरबार में पं. भीमसेन जोशी, गिरिजा देवी, पं. जसराज, सोनल मानसिंह, पं. बिरजू महाराज, हरिप्रसाद चौरसिया, गुलाम अली भी संगीत साधना कर चुके हैं।

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