महाबली का आंगन। संकटमोचन संगीत समारोह का 101 वां वर्ष। नए शताब्दी वर्ष के पहले आयोजन की पहली निशा। पहला दिन 30 मिनट की देरी से शुरूआत हुई। दर्शक शाम से पहुंचने लगे थे। वर्ष भर की प्रतीक्षा के बाद छह दिनों तक संगीत साधना के अनुष्ठान का साक्षी बनने की आतुरता हर चेहरे पर नजर आ रही थी।
Sankat Mochan Sangeet Samaroh 2024: तबले की थाप पर एक टुकड़े में सजा पांच पीढ़ियों का अंदाज; देखें PHOTO
Sankat Mochan Sangeet Samaroh 2024: 16 मिनट की नृत्य अवधि में शिष्यों की टोली ने गुरु चरणों के साथ ही संकटमोचन के दरबार में नमन किया। इसके उपरांत वनमाली दास द्वारा सृजित अभिनयम् के तहत भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर महारास के अंशों को सुजाता महापात्रा ने ओडिसी के जरिए जीवंत किया।
ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करते पंडित रतिकांत महापात्रा और सुजाता महापात्रा
संकटमोचन संगीत समारोह की प्रथम निशा
शनिवार को 101वें संकट मोचन संगीत समारोह की पहली निशा की शुरूआत पं. रतिकांत महापात्रा के ओडिसी नृत्य से हुआ। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र की अनुमति लेकर और बजरंगबली को प्रणाम करने के बाद रतिकांत महापात्र मंच पर पहुंचे। 25 सालों से अनवरत बजरंगबली की ड्योढ़ी पर ओडिसी के जरिए संगीतांजलि अर्पित करने वाले रतिकांत महापात्रा ने शबरी के मंचन से शुरूआत की।
भगवान राम की प्रतीक्षा में प्रतीक्षारत शबरी की पीड़ा, भगवान राम के मिलन की खुशी और भगवान को प्रेमभाव से जूठे बेर अर्पित करने का भाव नृत्य के जरिए मंच पर सजीव हुआ। 20 मिनट की प्रस्तुति में पं. रतिकांत ने अपने पिता पं. केलुचरण महापात्रा की ओडिसी की परंपरा के दर्शन भी कराए।
नृत्य करते कलाकार
प्रभु के आगमन पर उनके श्रीचरणों में नतमस्तक होने का भाव श्रोताओं को मुरीद बना गया। पूरा प्रांगण जय श्रीराम, जय जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। दूसरी प्रस्तुति में उनके शिष्यों की टोली ने शिव संगमम में चंद्र सूर्य शिवशंकर गौरी रमणायते नमो नम:...पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
पं. रतिकांत महापात्र और सुजाता महापात्रा ने जटायु मोक्ष प्रसंग से समारोह की पहली प्रस्तुति को विराम दिया। प्रसंग में जटायु का रावण के साथ युद्ध और युद्ध में घायल जटायु के अंतिम क्षणों की भाव-भंगिमाएं दर्शकों की कोर को नम कर गई। नृत्य प्रस्तुति में सुजाता महापात्रा, राजश्री प्रहराज, ऐश्वर्या शिंदे, प्रीतिशा महापात्रा, जी. संजय ने सहयोग किया।
इसके बाद बारी थी संकटमोचन संगीत समारोह की सबसे नवोदित कलाकार अवंतिका महाराज की। बनारस घराने की अवंतिका ने 30 मिनट की प्रस्तुति में पांच पीढि़यों के तबला वादन की बाजीगरी से श्रोताओं का प्रेम और आशीर्वाद बटोरा।
तबले की थाप पर एक टुकड़े में पांच पीढि़यों का अंदाज संकटमोचन की अंगनाई ने भी महसूस किया। महज 12 साल की अवंतिका ने सधे हुए बनारसबाज की तरह हर थाप से गंधर्वजेता के चरणों में नमन किया। अवंतिका ने 16 मात्रा तीन ताल में उठान से शुरूआत की।
जब दर्शकों ने की डिमांड
इसके बाद चलनचारी में विलंबित से लेकर द्रुत गति के बाद पाट पेश किया। इसमें चार लय बराबर, सवाई, झूलना, रेला का समन्वय सुधि श्रोताओं का मन मोह गया। बाल कलाकार ने जनता की मांग पर टुकड़ा, तिहाई पेश किया।
इसके बाद अंत में बनारस के दिग्गज पं. राम सहाय के भतीजे पं. भैरव सहाय, उनके बेटे पं. बलदेव सहाय, कंठे महाराज और पं. सामता प्रसाद, पं. गुदई महाराज, पं. किशन महाराज, पं. शारदा सहाय, पं. नंदन मेहता और अपने पिता पूरन महाराज का टुकड़ा पेश किया। दूसरी प्रस्तुति का समापन अवंतिका ने श्रीराम परन से किया। पंजाब के पं. विनायक सहाय ने सारंगी पर लहरा दिया। मंच संचालन साधना श्रीवास्तव व व्यामेश शुक्ल ने किया।