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धर्म को रोजगार से जोड़ने के लिए संतों ने बनाई योजना, काशी में खुलेगा पुजारी प्रशिक्षण केंद्र

Tue, 05 Jan 2021 10:01 AM IST
गीतार्जुन गौतम आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 05 Jan 2021 10:01 AM IST
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Saints formulated scheme to connect religion with employment priest training center will open in Kashi
संत बालक दास। - फोटो : अमर उजाला

धर्म की नगरी काशी में पुजारी प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी है। कर्मकांड और पूजा के  प्रशिक्षण के साथ ही संस्कृतनिष्ठ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी मौजूद होंगे। अखिल भारतीय संत समिति ने इसका खाका तैयार कर लिया है। प्रशिक्षण केंद्र से निकले कर्मकांडी देश ही नहीं दुनिया के हिंदू मंदिरों में पूजा और पाठ कराएंगे।

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काशी में खुलने वाले पुजारी प्रशिक्षण केंद्र में गुरु कुल की तर्ज पर कर्मकांडी तैयार किए जाएंगे। प्रशिक्षण केंद्र के लिए शहर के बीचों-बीच जमीन की तलाश की जा रही है। पांच एकड़ क्षेत्र में बनने वाले प्रशिक्षण केंद्र में पहले चरण में चार सौ कर्मकांडी छात्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
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अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि काशी धर्म की नगरी है और काशी में ही पुजारी प्रशिक्षण केंद्र खुलेगा। दो दिवसीय अखिल भारतीय संत समिति की बैठक में इस मुद्दे पर संतों ने अपनी सहमति जता दी है। शहर के मध्य में ही पांच एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। प्रशिक्षण केंद्र में सनातन धर्म के युवाओं को कर्मकांड और पूजा का प्रशिक्षण आचार्य देंगे।

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दिया जाएगा। यहां से निकलने वाले प्रशिक्षु देश के साथ ही दुनिया भर के हिंदू मंदिरों में पूजा के लिए भेजे जाएंगे। प्रशिक्षित कर्मकांडी की संख्या बेहद कम है। इसको ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय संत समिति ने कर्मकांड और पूजा प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना पर सहमति दी है।

गांव के मंदिरों में है पुजारियों की कमी
पाताल पुरी पीठाधीश्वर बालक दास महाराज ने बताया देश के ग्रामीण इलाकों में मंदिर तो हैं लेकिन वहां पर पुजारियों की संख्या सीमित है। ऐसे ही आदिवासी इलाकों का भी यही हाल है। ऐसी दशा में काशी में खुलने वाला पुजारी प्रशिक्षण केंद्र देश भर के मंदिरों में पुजारियों की कमी को दूर करेगा।

संस्कृत अध्ययन करने वालों को मिलेगा रोजगार
राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि संस्कृत का अध्ययन करने वाले युवाओं को पुजारी प्रशिक्षण केंद्र के जरिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। कौशल विकास की तर्ज पर ही यहां संस्कृत के अध्ययन करने वाले छात्रों को व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ ही रोजगार भी दिया जाएगा। काशी में पुजारी प्रशिक्षण केंद्र के लिए भूमि चयन करने के बाद प्रशिक्षण केंद्र के स्वरूप को तय किया जाएगा।

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