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सैदपुर : ढाई दशक से जीत के लिए तरस रही भाजपा

Fri, 28 Jan 2022 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jan 2022 11:15 PM IST
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Saidpur: BJP longing for victory for two and a half decades
आरक्षित वर्ग की सीट सैदपुर पर ढ़ाई दशक से कमल नहीं खिला है। साल 2000 से अब तक यहां चार बार आम चुनाव और 2002 में एक बार उपचुनाव हुआ है। पिछले पांच चुनाव से इस सीट पर भाजपा को पूरा जोर लगाने के बावजूद सफलता नहीं मिली है। हालांकि इस बार सपा से दो बार विधायक रहे सुभाष पासी को भाजपा ने शामिल कर सपा के मजबूत गढ़ में सेंधमारी का प्रयास किया है। यह देखते हुए सपा भी अपना किला बचाने की जुगत में है। अभी किसी ने प्रत्याशियों के पत्ते नहीं खोले हैं।
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वैसे सैदपुर के साढ़े तीन दशक के चुनावी इतिहास को खंगाले तो यहां 1991 और 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से डा. महेंद्र नाथ पांडेय को जीत मिली थी। दोनों बार सपा ही इनकी निकटतम प्रतिद्वंदी रही और गिनती के वोटों से ही हार जीत तय हुई थी। वर्ष 2002 की 14वीं विधानसभा में बसपा के कैलाश नाथ यादव, 2004 के उपचुनाव में सपा के राजनाथ यादव और 2007 में बसपा के दीनानाथ पांडेय की इस क्षेत्र से ताजपोशी हुई थी। तब इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थितियां अलग थी। सैदपुर विधानसभा क्षेत्र का दो तिहाई हिस्सा वाराणसी जनपद और एक तिहाई हिस्सा गाजीपुर में था। 2012 के नए परिसीमन में यह सीट गाजीपुर जिले की सुरक्षित सीट के रूप में सैदपुर और देवकली ब्लाक को मिला कर बनाई गई थी।
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नई सीट बनने के बाद 2012 और 2017 दोनों बार समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के रूप में सुभाष पासी जीत हासिल करने में सफल रहे। वर्ष 2012 में सुभाष पासी ने सपा प्रत्याशी के रूप में बसपा के अमेरिका प्रधान को 41989 मतों से परास्त किया था। उस वक्त कौमी एकता दल के भोनू सोनकर तीसरे स्थान पर थे। भाजपा प्रत्याशी को चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सुभाष पासी ने भाजपा के प्रादेशिक महामंत्री एवं पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर को कुल 8710 मतों से हरा कर सपा की सीट को बचाए रखने में कामयाबी हासिल की थी। उस वक्त विद्यासागर सोनकर ने सैदपुर विधानसभा क्षेत्र के पश्चिमी भाग से लगभग 8 हजार से अधिक मतों की बढ़त बना रखी थी किंतु सैदपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्वी भाग यानी देवकली ब्लाक से जुड़े बूथों की ईवीएम खुलते ही सुभाष पासी का भाग्य जगने लगा और वह 7500 से अधिक मतों से पिछड़ने के बावजूद बढ़त लेते हुए अंतिम चरण में लगभग 9000 मतों से जीत गए थे।
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