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बाबा साहेब न गांधी विरोधी न धर्म के खिलाफ
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2015 02:16 AM IST
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वाराणसी। डा. भीमराव अंबेडकर न धर्म विरोधी थे और न ही गांधी के खिलाफ। उन्होंने मार्क्सवाद का कदम-कदम पर विरोध किया जबकि धर्म के मौलिक तत्वों का समर्थन किया।
ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने कहीं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब कर्मकांड के विरोधी थे, न कि धर्म के। लोगों में उनको लेकर कई तरह की नकारात्मक धारणाएं हैं, जिसके निराकरण के लिए उनके व्यक्ति और कृतित्व के व्यापक अध्ययन की जरूरत है।
बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में डा. अंबेडकर जयंती पर मंगलवार को ‘डा. भीमराव अंबेडकर : व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ पर व्याख्यान में डा. गोपाल ने कहा कि बाबा साहेब की 125 वीं जयंती पर भी उनके बारे में समग्र अध्ययन की जरूरत महसूस की जा रही है क्योंकि हमने उन्हें ठीक से समझा ही नहीं।
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कहा कि डा. अंबेडकर बिना वाणी की जनता के संघर्ष के नायक थे। लोग मानते हैं उनका महात्मा गांधी से बैर था लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दोनों एक ही उद्देश्य के लिए लड़ रहे थे।
आरक्षण के सवाल पर दोनों में मतभेद हुआ था, जिसमें महामना मदन मोहन मालवीय ने समझौता कराया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने किया। स्वागत प्रो. प्रियंकर उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन डा. लालचंद ने किया। संचालन प्रो. पद्मिनी रविंद्रनाथ ने किया।
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ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने कहीं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब कर्मकांड के विरोधी थे, न कि धर्म के। लोगों में उनको लेकर कई तरह की नकारात्मक धारणाएं हैं, जिसके निराकरण के लिए उनके व्यक्ति और कृतित्व के व्यापक अध्ययन की जरूरत है।
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बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में डा. अंबेडकर जयंती पर मंगलवार को ‘डा. भीमराव अंबेडकर : व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ पर व्याख्यान में डा. गोपाल ने कहा कि बाबा साहेब की 125 वीं जयंती पर भी उनके बारे में समग्र अध्ययन की जरूरत महसूस की जा रही है क्योंकि हमने उन्हें ठीक से समझा ही नहीं।
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कहा कि डा. अंबेडकर बिना वाणी की जनता के संघर्ष के नायक थे। लोग मानते हैं उनका महात्मा गांधी से बैर था लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दोनों एक ही उद्देश्य के लिए लड़ रहे थे।
आरक्षण के सवाल पर दोनों में मतभेद हुआ था, जिसमें महामना मदन मोहन मालवीय ने समझौता कराया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने किया। स्वागत प्रो. प्रियंकर उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन डा. लालचंद ने किया। संचालन प्रो. पद्मिनी रविंद्रनाथ ने किया।