Varanasi: काशी की संकरी गलियों में घूमे संघ प्रमुख मोहन भागवत, कालभैरव और बाबा विश्वनाथ का लिया आशीर्वाद
काशी प्रांत की पांच दिवसीय यात्रा के चौथे दिन आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत शुक्रवार को ई-रिक्शा की सवारी करते हुए कालभैरव मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने विधिवत पूजन अर्चन किया। इसके बाद काशी विश्वनाथ की सप्तर्षि आरती में शामिल हुए।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष से लगाई जा रही धंधेश्वर महादेव शाखा में सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि धर्म हमारे मूल में है, मगर हमारा विचार मौलिक होना चाहिए। सनातन धर्म ही हिंदू राष्ट्र और हिंदू संस्कृति है। भारत के हर गांव में आरएसएस की शाखा होनी चाहिए और उसके हर सदस्य को देश की प्रगति के लिए प्रयास करना चाहिए। शाखा में शामिल होने के बाद संघ प्रमुख काशी की तंग गलियों से होते हुए विश्व मांगल्य सभा भी पहुंचे।
सप्तर्षि आरती में लिया महादेव का आशीर्वाद
सरसंघचालक मोहन भागवत ई-रिक्शा की सवारी करते हुए कालभैरव मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने विधिवत पूजन अर्चन किया। इसके बाद काशी विश्वनाथ की सप्तर्षि आरती में शामिल हुए। महादेव का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद उन्होंने धाम परिसर का भी अवलोकन किया।
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विश्व मांगल्य सभा में ग्रहण किया नारियल
गलियों में पैदल चलकर ब्रह्माघाट स्थित विश्व मांगल्य सभा परिसर में पहुंचे मोहन भागवत का स्वागत कुमकुम चंदन से किया गया। उन्हें नारियल भेंट किया गया। इसके बाद उन्होंने वहां विश्व मांगल्य सभा के पदाधिकारियों से उनकी कार्ययोजना पर लंबी चर्चा की। इस दौरान उन्होंने प्रसाद भी खाया।
हर गांव और मोहल्ले में संघ की शाखा लगाएं
काशी प्रांत की पांच दिवसीय यात्रा के चौथे दिन आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत शुक्रवार को बिंदु माधव के पास धंधेश्वर महादेव शाखा में स्वयंसेवकों के साथ मौजूद रहे। इस दौरान संघ प्रमुख ने कहा कि धर्म से ज्यादा हमें विचारों पर ध्यान देना होगा। हर गांव और मोहल्ले में संघ की शाखा लगाएं। आने वाली पीढि़यों का राष्ट्रहित के प्रति जुड़ाव पैदा करें। उन्होंने कहा कि हमारे संस्कार, संस्कृति और परंपराएं ही हमें मजबूत करती हैं। इसलिए स्वयंसेवकों को आगे बढ़कर समाज का नेतृत्व करना चाहिए। भारत के गौरव और विरासत के प्रति पूर्ण निष्ठा के साथ स्वयंसेवकों को देश की तरक्की के लिए काम करना चाहिए।
संघ प्रमुख ने कहा कि हमें देश के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार रहना होगा। हमारे विचारों में भले ही भिन्नता हो, लेकिन हमारे मस्तिष्क में भिन्नता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक कमजोर समाज राजनीतिक आजादी के फल का आनंद नहीं ले सकता। कुछ क्रूर शक्तियां और उनके एजेंट आज भी इस कोशिश में लगे हुए हैं कि भारत टूट जाए और उसकी तरक्की न हो। इससे पहले शाखा में स्वयंसेवक ने गीत भी सुनाया। उन्होंने स्वयंसेवकों से मुलाकात कर उनका हालचाल भी जाना। इसके बाद वे ब्रह्माघाट स्थित विश्व मांगल्य सभा भी पहुंचे। वहां उनका भव्य स्वागत किया गया।