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काशी में पलट प्रवाह : विश्वनाथ मंदिर में 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 3 किमी लंबी कतार
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काशी में पलट प्रवाह : विश्वनाथ मंदिर में 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 3 किमी लंबी कतार
- प्रयागराज महाकुंभ से आए श्रद्धालुओं ने दिलाई सावन की याद
- जंगमबाड़ी मठ, नीचीबाग, बुलानाला, मैदागिन चौराहा और दशाश्वमेध घाट से गंगा द्वार तक लाइन लगी
- एक सेकंड में मिले बाबा के झांकी दर्शन, 130 किमी से आए श्रद्धालुओं की थकान हुई दूर
- एक श्रद्धालु बेहोश, पुलिस ने स्ट्रेचर से भेजा मंडलीय अस्पताल
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। प्रयागराज महाकुंभ से आए 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए। गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। यह पहला मौका था, जब महाकुंभ से आने वाले इतने श्रद्धालुओं ने बाबा धाम में पूजा-अर्चना की। भीड़ इतनी थी कि तीन किलोमीटर लंबी लाइन लगी। जंगमबाड़ी मठ, नीचीबाग, बुलानाला, मैदागिन चौराहा और दशाश्वमेध घाट से गंगा द्वार तक श्रद्धालु कतार में खड़े रहे। ऐसा लगा कि सावन है। गेट नंबर चार पर तीन द्वार से प्रवेश दिया गया।
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ही काशी विश्वनाथ धाम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। एक-एक करके श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में भेजा और उन्हें झांकी दर्शन कराया गया। कई श्रद्धालु ऐसे मिले, जो 3-4 घंटे तक लाइन में खड़े रहने के बाद झांकी दर्शन सके, फिर भी वे उत्साहित दिखे। श्रद्धालुओं का कहना था कि प्रयागराज से 130 किमी से की दूरी तय करके आए हैं। दर्शन पाने से थकान मिट गई।
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, मंगला आरती के साथ ही बुधवार को दर्शन-पूजन शुरू हो गया था। भोर चार बजे से रात 11 बजे तक दर्शन का सिलसिला चलता रहा। गर्भगृह के बाहर से एक सेकंड से भी कम समय में ज्योर्तिलिंग के झांकी दर्शन पाकर श्रद्धालु उत्साहित दिखे। हर-हर महादेव के जयघोष होता रहा।
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भीषण सर्दी में उत्साह कम नहीं हुआ, मंगलवार की आधी रात से लगी श्रद्धालुओं की कतार
मंगलवार की आधी रात से ही गेट नंबर-4, गंगा द्वार और चौक पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया था। मंगला आरती के बाद मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हुआ। सुबह 4 बजे से 10 बजे तक 33 हजार और सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने अरघा के जरिये बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। रात 11 बजे तक श्रद्धालुओं की संख्या 3 लाख से ज्यादा पहुंच गई। भीषण सर्दी भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं कर सकी। हालांकि ठंड लगने से एक श्रद्धालु बेहोश हो गया, जिसे पुलिस ने स्ट्रेचर से मंडलीय अस्पताल पहुंचाया।
सामान्य प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं को परेशानी
दोपहर के दो से शाम चार बजे तक विशिष्ट अनुरोध दर्शन भी कुछ प्रभावित रहा। अति विशिष्ट को ही मंदिर में झांकी दर्शन करने की अनुमति मिली। सामान्य प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं को प्रोटोकॉल ऑफिस तक भी नहीं जाने दिया गया। इस कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। सबको बैरिकेडिंग वाले द्वार से भेजा गया।
काल भैरव मंदिर की गलियों में 2 किमी लाइन
विश्वनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने काल भैरव मंदिर में भी दर्शन किए। यहां पहुंचे श्रद्धालुओं की लाइन गलियों में दो किलोमीटर तक लगी रही। जतंबर और बीबी हटिया गली श्रद्धालुओं की भीड़ दिखी। वहां रहने वाले लोग घरों में कैद हो गए। सुरक्षाकर्मियों ने घर से निकलने तक की अनुमति नहीं दी। सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि भीड़ ज्यादा है। घरों में सुरक्षित रहेंगे।
पर्यटन विभाग के 9 हेल्प डेस्क भी बने
पर्यटन विभाग ने 9 हेल्प डेस्क बनाए। नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने बताया गया कि 13 स्थायी और 19 अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं। 15 अस्थायी रैन बसेरों को भी शुरू किया गया है, ताकि ज्यादा लोगों को आश्रय दिया जा सके।
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- प्रयागराज महाकुंभ से आए श्रद्धालुओं ने दिलाई सावन की याद
- जंगमबाड़ी मठ, नीचीबाग, बुलानाला, मैदागिन चौराहा और दशाश्वमेध घाट से गंगा द्वार तक लाइन लगी
- एक सेकंड में मिले बाबा के झांकी दर्शन, 130 किमी से आए श्रद्धालुओं की थकान हुई दूर
- एक श्रद्धालु बेहोश, पुलिस ने स्ट्रेचर से भेजा मंडलीय अस्पताल
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। प्रयागराज महाकुंभ से आए 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए। गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। यह पहला मौका था, जब महाकुंभ से आने वाले इतने श्रद्धालुओं ने बाबा धाम में पूजा-अर्चना की। भीड़ इतनी थी कि तीन किलोमीटर लंबी लाइन लगी। जंगमबाड़ी मठ, नीचीबाग, बुलानाला, मैदागिन चौराहा और दशाश्वमेध घाट से गंगा द्वार तक श्रद्धालु कतार में खड़े रहे। ऐसा लगा कि सावन है। गेट नंबर चार पर तीन द्वार से प्रवेश दिया गया।
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ही काशी विश्वनाथ धाम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। एक-एक करके श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में भेजा और उन्हें झांकी दर्शन कराया गया। कई श्रद्धालु ऐसे मिले, जो 3-4 घंटे तक लाइन में खड़े रहने के बाद झांकी दर्शन सके, फिर भी वे उत्साहित दिखे। श्रद्धालुओं का कहना था कि प्रयागराज से 130 किमी से की दूरी तय करके आए हैं। दर्शन पाने से थकान मिट गई।
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मंदिर प्रशासन के मुताबिक, मंगला आरती के साथ ही बुधवार को दर्शन-पूजन शुरू हो गया था। भोर चार बजे से रात 11 बजे तक दर्शन का सिलसिला चलता रहा। गर्भगृह के बाहर से एक सेकंड से भी कम समय में ज्योर्तिलिंग के झांकी दर्शन पाकर श्रद्धालु उत्साहित दिखे। हर-हर महादेव के जयघोष होता रहा।
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भीषण सर्दी में उत्साह कम नहीं हुआ, मंगलवार की आधी रात से लगी श्रद्धालुओं की कतार
मंगलवार की आधी रात से ही गेट नंबर-4, गंगा द्वार और चौक पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया था। मंगला आरती के बाद मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हुआ। सुबह 4 बजे से 10 बजे तक 33 हजार और सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने अरघा के जरिये बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। रात 11 बजे तक श्रद्धालुओं की संख्या 3 लाख से ज्यादा पहुंच गई। भीषण सर्दी भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं कर सकी। हालांकि ठंड लगने से एक श्रद्धालु बेहोश हो गया, जिसे पुलिस ने स्ट्रेचर से मंडलीय अस्पताल पहुंचाया।
सामान्य प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं को परेशानी
दोपहर के दो से शाम चार बजे तक विशिष्ट अनुरोध दर्शन भी कुछ प्रभावित रहा। अति विशिष्ट को ही मंदिर में झांकी दर्शन करने की अनुमति मिली। सामान्य प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं को प्रोटोकॉल ऑफिस तक भी नहीं जाने दिया गया। इस कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। सबको बैरिकेडिंग वाले द्वार से भेजा गया।
काल भैरव मंदिर की गलियों में 2 किमी लाइन
विश्वनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने काल भैरव मंदिर में भी दर्शन किए। यहां पहुंचे श्रद्धालुओं की लाइन गलियों में दो किलोमीटर तक लगी रही। जतंबर और बीबी हटिया गली श्रद्धालुओं की भीड़ दिखी। वहां रहने वाले लोग घरों में कैद हो गए। सुरक्षाकर्मियों ने घर से निकलने तक की अनुमति नहीं दी। सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि भीड़ ज्यादा है। घरों में सुरक्षित रहेंगे।
पर्यटन विभाग के 9 हेल्प डेस्क भी बने
पर्यटन विभाग ने 9 हेल्प डेस्क बनाए। नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने बताया गया कि 13 स्थायी और 19 अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं। 15 अस्थायी रैन बसेरों को भी शुरू किया गया है, ताकि ज्यादा लोगों को आश्रय दिया जा सके।