आईआईटी बीएचयू की बड़ी खोज: निकिल मुक्त स्टील उपकरण से अंग प्रत्यारोपण में खर्च होगा कम, मजबूती भी मिलेगी
आईआईटी बीएचयू मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने निकिल मुक्त धातु बनाने में सफलता पाई है जो कि अंग प्रत्यारोपण में उपयोग होने वाले सर्जिकल ग्रेड स्टील से सुरक्षित मजबूत और वजन में भी हल्का है।
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अंग प्रत्यारोपण में अब निकिल मुक्त स्टील के धातु का प्रयोग किया जा सकेगा। यह अन्य धातुओं के मुकाबले जहां सस्ता है वहीं सुरक्षित और मजबूती भी है। आईआईटी बीएचयू मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने निकिल मुक्त धातु बनाने में सफलता पाई है जो कि अंग प्रत्यारोपण में उपयोग होने वाले सर्जिकल ग्रेड स्टील से सुरक्षित मजबूत और वजन में भी हल्का है।
मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गिरिजा शंकर महोबिया के मुताबिक वर्तमान समय में अंग प्रत्यारोपण में जो सर्जिकल ग्रेड स्टील की धातु का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें टाइटेनियम और कोबाल्ट प्रीमियम का प्रयोग होता है जिस वजह से यह ज्यादा महंगा होता है।
साथ ही इसमें निकिल की मात्रा अधिक होने की वजह से शरीर में एलर्जी के साथ ही कैंसर, सूजन, प्रत्यारोपण वाले जगह पर त्वचा संबंधी परेशानियां भी शुरू हो जाती हैं। अब निकिल मुक्त सर्जिकल ग्रेड स्टील धातु के प्रयोग करने से लोगों को इन समस्याओं से निजात मिल सकती है।
पिछले साल अप्रैल में फाइल हुआ पेटेंट
डॉक्टर महोबिया के मुताबिक वर्ष 2016 में ही इस शोध को करने की हरी झंडी मिल गई थी। इस्पात मंत्रालय की ओर से 2 करोड़ 84 लाख रुपए का फंड भी मिला था। पिछले साल अप्रैल में ही इसका पेटेंट भी फाइल किया जा चुका है। इसका प्रयोग शरीर के अनुकूल होने के कारण स्टेंट, पेसमेकर,वॉल्व आदि बनाने में भी किया जा सकता है। उधर, आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर प्रमोद जैन ने बताया कि इस शोध को आम जनमानस के लिए उपयोगी बताया और कहा कि इसमें अलग-अलग इस्पात निर्माताओं और प्रत्यारोपण उपकरण बनाने वाले उद्योगों ने भी अपनी रुचि दिखाई है।