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Varanasi News: बीएचयू शोध
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शहर के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर रखने के लिए पार्क और उद्यान की मिट्टी में जैव विविधता की सुरक्षा बेहद जरूरी है। जैव विविधता के कारण ही शहर का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र बेहतर होता है। विश्व के 16 देशों की 56 नगर पालिकाओं के शहरी पार्कों में शोध के बाद यह सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय शोध टीम में बीएचयू के शोधकर्ता भी शामिल हैं।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पर्यावरण और सम्पोष्य विकास संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जय प्रकाश वर्मा और शोध छात्र अर्पण मुखर्जी सहित एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने अध्ययन के बाद सुझाव दिया है। उनका कहना है कि शहरी क्षेत्रों के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए शहर के पार्कों, उद्यानों या हरित क्षेत्रों की मृदा की जैव विविधता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। डॉ. वर्मा ने कहा कि शहर के पार्क और उद्यान बैक्टीरिया, कवक, प्रोटिस्ट और अकशेरूकीय सहित मिट्टी के जीवों को पोषित करते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि इन मृदा जीवों की जैव विविधता शहर के पार्कों और उद्यानों के रखरखाव और स्थिरता के लिए आवश्यक है। डॉ. वर्मा ने कहा कि स्वस्थ और जीवंत पार्कों व उद्यानों के बेहतर रखरखाव के लिए सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है। अध्ययन के नतीजे अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर इकोलॉजी एंड इनोल्यूशन में प्रकाशित किए गए हैं।
लिए गए 16 देशों की मिट्टी के नमूने
डॉ. वर्मा ने बताया कि अध्ययन में 16 देशों की 56 नगर पालिकाओं के शहर के पार्कों और उद्यानों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए थे। इनमें भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, अमेरिका, चिली, स्पेन, नाइजीरिया, स्विट्जरलैंड, स्लोवेनिया, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मैक्सिको, इजराइल और एस्टोनिया शामिल हैं। अध्ययन के दौरान मिट्टी में 537 माइक्रोबियल फाइलोटाइप्स की पहचान की गई। सूक्ष्म जीवों के कारण ही मिट्टी को जीवित वस्तु कहा जाता है और मिट्टी के ये सूक्ष्म जैविक गुण पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में मदद करते हैं। सूक्ष्मजीव वे हैं जो मिट्टी के गुणों और स्वास्थ्य को परिभाषित करते हैं।
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अध्ययन से मिले नवीन साक्ष्य
डॉ. वर्मा ने कहा की बड़ी जैव विविधता वाली मिट्टी में भी अधिक जैव-भू-रासायनिक गतिविधियां होती हैं। मिट्टी के वर्गीकरण और आनुवंशिक विविधता कई पारिस्थितिक तंत्र गतिविधियों को अंजाम देती है। यह अध्ययन नवीन साक्ष्य प्रदान करता है कि मृदा का वर्गीकरण और आनुवंशिक विविधता सकारात्मक रूप से पारिस्थितिकी तंत्र कार्यों के कई आयामों के साथ जुड़ी हुई है।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पर्यावरण और सम्पोष्य विकास संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जय प्रकाश वर्मा और शोध छात्र अर्पण मुखर्जी सहित एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने अध्ययन के बाद सुझाव दिया है। उनका कहना है कि शहरी क्षेत्रों के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए शहर के पार्कों, उद्यानों या हरित क्षेत्रों की मृदा की जैव विविधता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। डॉ. वर्मा ने कहा कि शहर के पार्क और उद्यान बैक्टीरिया, कवक, प्रोटिस्ट और अकशेरूकीय सहित मिट्टी के जीवों को पोषित करते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि इन मृदा जीवों की जैव विविधता शहर के पार्कों और उद्यानों के रखरखाव और स्थिरता के लिए आवश्यक है। डॉ. वर्मा ने कहा कि स्वस्थ और जीवंत पार्कों व उद्यानों के बेहतर रखरखाव के लिए सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है। अध्ययन के नतीजे अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर इकोलॉजी एंड इनोल्यूशन में प्रकाशित किए गए हैं।
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लिए गए 16 देशों की मिट्टी के नमूने
डॉ. वर्मा ने बताया कि अध्ययन में 16 देशों की 56 नगर पालिकाओं के शहर के पार्कों और उद्यानों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए थे। इनमें भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, अमेरिका, चिली, स्पेन, नाइजीरिया, स्विट्जरलैंड, स्लोवेनिया, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मैक्सिको, इजराइल और एस्टोनिया शामिल हैं। अध्ययन के दौरान मिट्टी में 537 माइक्रोबियल फाइलोटाइप्स की पहचान की गई। सूक्ष्म जीवों के कारण ही मिट्टी को जीवित वस्तु कहा जाता है और मिट्टी के ये सूक्ष्म जैविक गुण पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में मदद करते हैं। सूक्ष्मजीव वे हैं जो मिट्टी के गुणों और स्वास्थ्य को परिभाषित करते हैं।
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अध्ययन से मिले नवीन साक्ष्य
डॉ. वर्मा ने कहा की बड़ी जैव विविधता वाली मिट्टी में भी अधिक जैव-भू-रासायनिक गतिविधियां होती हैं। मिट्टी के वर्गीकरण और आनुवंशिक विविधता कई पारिस्थितिक तंत्र गतिविधियों को अंजाम देती है। यह अध्ययन नवीन साक्ष्य प्रदान करता है कि मृदा का वर्गीकरण और आनुवंशिक विविधता सकारात्मक रूप से पारिस्थितिकी तंत्र कार्यों के कई आयामों के साथ जुड़ी हुई है।