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एनआरआई सम्मेलनः टेंट सिटी में दिखेगी धर्म और कला की झलक, जानिए काशी में बसाए गए शहर की खूबियां

Sun, 06 Jan 2019 10:13 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: Priyesh Mishra Updated Sun, 06 Jan 2019 10:13 AM IST
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Religion and art will see in tent city during pravasi bhartiya sammelan
सम्मेलन को लेकर चल रहा काम - फोटो : amar ujala
प्रवासी भारतीय सम्मेलन को लेकर वाराणसी के ऐढ़े गांव में टेंट सिटी बनाई जा रही है। यह सिटी काशी आने वाले अतिथियों के लिए खास होगी। इस टेंट सिटी को कुछ इस तरह डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें एक शहर में मिलने वाली सभी सुविधाएं होंगी।
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वहीं इस अस्थायी शहर में काशी के धर्म और कला की झलक भी देखने को मिलेगी। एक-एक टेंट को अलग-अलग नाम दिया जाएगा। वहीं सड़कों का भी नामकरण किया जाएगा। 21 से 23 जनवरी तक होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन को देखते हुए पूरे शहर को सजाया जा रहा है।
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वहीं इन मेहमानों को रुकने के लिए स्विस कॉटेज बनाए जा रहे हैं। 600 से अधिक संख्या में बनने वाले टेंटों में कुल तीन तरह के टेंट लगाए जा रहे हें। एक वीवीआईपी टेंट, जिसमें एक बेड के साथ उच्चस्तरीय सुविधा होगी, इसे नाम विला दिया गया है। दूसरा वह जिसमें दो बेड होंगे। तीसरा ऐसा होगा, जिसमें चार बेड लगाए जाएंगे। सिंगल बेड वाले स्विस कॉटेज को दो राउंड में कुल 50 विला बनाए गए हैं।
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आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार से अपने आवास तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो। इसके लिए हर एक समूह में लगाए गए टेंटों को नाम दिया जा रहा है। इन्हें गंगा, यमुना, गोदावरी, क्षिप्रा, वरूणा, गोमती और सरस्वती नाम रखने का प्रस्ताव हुआ है। वहीं सिटी के अंदर वाले मार्ग का भी नाम भगवान के नाम से रखा जाएगा। ताकि काशी आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिकता का एहसास हो सके।
 

क्या देखेंगे, कहां घूमेंगे, मेहमान खुद तय करेंगे

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तैयार की जा रही टेंट सिटी - फोटो : amar ujala
सम्मेलन में आने वाले मेहमान खुद तय करेंगे कि वे काशी में क्या देखेंगे, कहां घूमेंगे या किस मंदिर में दर्शन पूजन करेंगे। शासन, प्रशासन की ओर से अतिथियों के घूमने, टहलने व पर्यटन को लेकर कोई बाध्यता नहीं होगी। पर्यटन विभाग ने प्रवासी अतिथियों के पर्यटन, दर्शन-पूजन को लेकर कार्ययोजना तैयार की है।

इसे पीबीडी (प्रवासी भारतीय दिवस) की साइट पर अपलोड किया जा रहा है। प्रवासी अपनी रुचि व श्रद्धा के आधार पर अपने लिए विकल्प चुन सकेंगे। चुनाव के आधार पर सैलानियों की संख्या तय की जाएगी और उसके लिए जरूरी सुविधा, संसाधन मुहैया कराए जाएंगे।

हेरिटेज वॉक, शाम की गंगा आरती, काशी विश्वनाथ मंदिर, सारनाथ, सुबह-ए-बनारस को केंद्र में रखकर भ्रमण कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। यह पीबीडी की साइट पर अपलोड किए जा रहे हैं। यह पूरी तरह से वैकल्पिक हैं। कौन किस जगह घूमने जाएगा, सुबह की आरती देखेगा या शाम की, यह प्रवासी भारतीय ही तय करेंगे। पीबीडी की साइट पर प्रवासी भारतीय अपने रुचि के अनुसार विकल्प चुनेंगे।

होटल में ठहरेंगे या टेंट सिटी में, इसका चुनाव भी प्रवासी ऑनलाइन ही कर रहे हैं। इसी के आधार पर शासन, प्रशासन को भी एक आंकड़ा मिल जाएगा कि कौन कहां जाएगा और क्या देखेगा। सम्मेलन के लिए जिले के  सभी होटलों के मिलाकर 1200 कमरें प्री बुक कर लिए गए हैं। प्रवासी अपनी क्षमता व पसंद के आधार पर होटल या टेंट सिटी आदि की बुकिंग कराएंगे और इसके लिए भुगतान करेंगे। 

निर्माण में दिखेगी काशी की पहचान

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टेंट सिटी के काम में लोग - फोटो : amar ujala
टेंट सिटी का हर डाइनिंग हाल भी कुछ अलग ही होगा। इसमें विला के लिए बनाए जा रहे डाइनिंग हॉल को भी मंदिर नुमा बनाया जा रहा है। वहीं एक दूसरे हॉल के प्रवेश द्वार पर काशी के गंगा घाटों की पेंटिंग बनाई जाएगी। ऐसे में वहां बनने वाले अस्पताल, पुलिस स्टेशन सहित सभी तरह के बनावट को कुछ अलग अलग तरह से बनाया जा रहा है।

वहीं कचहरी से लेकर ऐढे गांव तक सड़क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। वहीं बीच में हेरिटेज लाइटिंग भी लगाई जा रही है। डिवाइडर पेंट किए जा रहे हैं, इसके अलावा उस मार्ग में आने वाली दीवारों को भी पेंट किया जा रहा है। ऐढ़े गांव के समीप पढ़ने वाले रिंग रोड के ओवर ब्रिज की दीवारों को भी पेंट किया जा रहा है, ताकि आने वाले मेहमानों को धार्मिकता का एहसास दिलाया जा सके।

उधर, सम्मेलन के दौरान 21 जनवरी को होने वाले उत्तर प्रदेश प्रवासी भारतीय दिवस में स्थानीय उद्यमी वाराणसी में उद्योग की संभावनाएं बताएंगे। इसके साथ ही वे विदेशों में वाराणसी के उत्पादों के लिए संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। डीएम सुरेंद्र सिंह ने बताया कि यूपी पीबीडी में यह नया सत्र जोड़ा जा रहा है।

 

प्रवासी सम्मेलन के दौरान अतिथियों के स्वागत व सहयोग में पर्यटक पुलिस को लगाया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें पर्यटन क्षेत्रों की खासियत व इतिहास से रूबरू कराने के लिए अप्रूव्ड गाइडों की मदद ली जाएगी। काशी के अलावा अन्य क्षेत्रों से अप्रूव्ड गाइड का सहयोग लिया जा रहा है। वे रास्ता दिखाने के साथ उनके सफर को आसान बनाएंगे।

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