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रावण जन्म से रामनगर की लीला का आगाज

Mon, 28 Sep 2015 02:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 28 Sep 2015 02:20 AM IST
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Ravana from birth of Ramnagar Dera Session starts
सैकड़ों साल पुरानी काशी की संस्कृति और मस्तमिजाजी का समागम रविवार की शाम जग विख्यात रामलीला के बहाने रामनगर में हुआ। कहीं प्रेम-सौहार्द की झलक तो कहीं ध्यान खींचते खास पहनावे और लोगों के अंदाज। माथे पर एक-दूसरे को तिलक लगाते समूहों के चेहरे की मुस्कान देखते बन रही थी। शाम करीब छह बजे रावण जन्म के साथ रविवार को विश्व विख्यात रामनगर की रामलीला का जोरदार आगाज हुआ।
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कुंवर अनंत नारायण सिंह की  मौजूदगी में रामबाग के मुख्य द्वार पर शुरू हुई लीला में जन्म के बाद रावण यज्ञ करने लगा। यज्ञ सफल होते ही ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर उसे अमरत्व का वरदान दे दिया। अमरत्व का वरदान पाते ही अहंकार से चूर रावण ने देवलोक में खलबली मचा दी। कुबेर पर आक्रमण कर उसका पुष्पक विमान छीन लिया। रावण के आतंक से भयभीत होकर देवराज इंद्र देवी-देवताओं के साथ बैकुंठ के लिए पलायन कर गए। रावण के अमरत्व का वरदान हासिल करने के बाद कुंभकर्ण ने छह महीना सोने और एक दिन जागने का वर मांगा। लीला के एक दृश्य में ब्रह्मा जी लंकिनी से कहते हैं कि राक्षसराज
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रावण लंबे समय तक लंका पर राज करेगा। लेकिन एक समय ऐसा आएगा, जब एक वानर का तुम लोग अपमान करोगे और वह लंका को जला देगा। इधर, रावण के आतंक से धरती कांपने लगती है। गाय के वेश में पृथ्वी ब्रह्मा के पास जाती है और रावण से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाती है। क्षीर सागर की भव्य झांकी के दर्शन के लिए लीला प्रेमियों की पहले दिन भीड़ उमड़ पड़ी थी। हाथ में टेढ़ी-मेढ़ी डिजाइन वाली छड़ियां, छाते लिए कुरता-धोती, अंगौछा धारण किए लोगों ने पीढ़ा पर बैठ कर लीला देखी। लोगों के हाथ में मानस की पोथियां भी थीं।
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परंपरा के अनुसार किले से शाही सवारी रविवार की शाम निकली तो उसकी झलक पाने के लिए लोग उमड़ पड़े। शाही बग्घी की सवारी जिधर से गुजरती उधर का इलाका हर-हर महादेव के जयघोष के गूंज उठता था। कुंवर अनंत नारायण लीला प्रेमियों का हाथ जोड़कर अभिवादन करते नजर आए। कुंवर ने रावण जन्म का मंचन हाथी पर सवार होकर देखा। शाही सवारी दुर्ग से शाम 4:55 बजे निकली। रामबाग के लीला स्थल पर शाही सवारी के पहुंचने पर 36वीं वाहिनी पीएसी के जवानों की टुकड़ी ने कुंवर अनंत नारायण को सलामी दी। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
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