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अनूठा संयोग, वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर एक ओर रामलीला का मंचन और नीचे जलती हैं चिताएं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 01 Oct 2020 03:39 PM IST
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Ramlila
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शिव की नगरी काशी का हर रंग ढंग निराला है। सात वार नौ त्योहार वाली काशी में रामलीला तो बेहद अनूठी होती है। भूतभावन शिव शंकर की तपस्थली महाश्मशान पर उनके आराध्य की लीला हर किसी के आकर्षण का केंद्र है। काशीखंड में वर्णित पंचतीर्थों में प्रमुख मणिकर्णिका तीर्थ पर श्रीराम की लीला और नीचे जलती हुई चिताएं।
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ऐसा विरोधाभास वाला उदाहरण काशी के अतिरिक्त दुनिया में और कहीं संभव नहीं है। एक तरफ भगवान शंकर मरने वालों को तारक मंत्र देते हैं वहीं दूसरी तरफ विश्व के महानायक श्रीराम चंद्र की लीला के जरिए मर्यादा का संदेश दिया जाता है।



मणिकर्णिका घाट की लीला शैव और वैष्णव संप्रदाय का अद्भुत संगम है। रामलीला के कोषाध्यक्ष सरित कुमार सिंह ने बताया कि काशी की रामलीलाएं जहां अश्विन मास में शुरू होती हैं वहीं मणिकर्णिका की रामलीला कार्तिक माह में आरंभ होती है। भगवान विष्णु को समर्पित माह में रामलीला का मंचन अद्भुत छटा बिखेरता है।
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